विश्व हृदय दिवस: कोरोना दे रहा दिल का मर्ज, तनाव-अनियमित दिनचर्या से बढ़ रहे हृदय रोगी
फेफड़ों के प्रभावित होने से हृदय में रक्तप्रवाह पर असर पड़ता है। इससे धमनियां अवरोधित होती हैं और हृदयाघात व अन्य गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि घर के साथ कार्य स्थल पर भी तनाव प्रबंधन की व्यवस्था की जाए। बढ़ते तनाव पर काबू के लिए योग और मेडिटेशन का सहारा लिया जाए।
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विस्तार
कोरोना महामारी के दौर में फेफड़ों के साथ हृदय पर भी खतरा मंडराने लगा है। हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनशैली और खान-पान पर ध्यान नहीं दिया गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है। क्योंकि फेफड़े के मर्ज ने हृदय को कमजोर करने का काम तेजी से किया है।
पीजीआई एडवांस कॉर्डियक सेंटर के प्रो. राजेश विजयवर्गीय ने बताया कि कोरोना में सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों पर बढ़ा है, जो पहले से किसी न किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसे मरीज जिनके फेफड़े संक्रमित हुए हैं, उनमें हृदय संबंधी विकार ज्यादा सामने आ रहा है, क्योंकि फेफड़ों के प्रभावित होने से हृदय में रक्तप्रवाह पर असर पड़ता है। इससे धमनियां अवरोधित होती हैं और हृदयाघात व अन्य गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि घर के साथ कार्य स्थल पर भी तनाव प्रबंधन की व्यवस्था की जाए। बढ़ते तनाव पर काबू के लिए योग और मेडिटेशन का सहारा लिया जाए। कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण अवश्य कराएं।
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इसका करें पालन
- धूम्रपान से बचें, अधिक शराब का सेवन न करें। प्रतिदिन 30-45 मिनट नियमित व्यायाम करें। स्वस्थ भोजन शैली अपनाएं।
- हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और असामान्य कोलेस्ट्रॉल के मरीज नियमित दवाइयां लें।
- कोरोना से बचाव के प्रोटोकॉल का पालन करें। हाथ की स्वच्छता, फेस मास्क पहनना और सामाजिक दूरी बनाएं रखें।
- शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 किग्रा/एम2 रखें। आदर्श वजन की गणना सेमी 100 में ऊंचाई के आधार पर की जा सकती है।
ऐसा भोजन लें
दैनिक आहार में सब्जियों (<200 ग्राम), फल (<200 ग्राम), अनाज और फाइबर (<20 ग्राम/डी) का सेवन बढ़ाएं। नमक का सेवन <5 होना चाहिए। उच्च संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थ लाल मांस, डेयरी उत्पाद, नारियल और ताड़ के तेल, उच्च ट्रांस-फैट सामग्री जैसे डीप-फ्राइड फास्ट फूड, बेकरी उत्पाद, पैकेज्ड स्नैक फूड से बचना चाहिए।
ये लक्षण हैं खतरनाक
छाती में दर्द, सीने में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ, गर्दन, जबड़े, गले, पेट, पैर या बाजुओं में दर्द, दिल की धड़कन का अचानक धीमा या तेज होना, पैरों या भुजाओं में सुन्नपन, चक्कर आना या बेहोशी और थकान।
पीजीआई करेगा जागरूक
विश्व हृदय दिवस पर पीजीआई की ओर से जागरूकता कार्यक्रम किया जाएगा। एडवांस कॉर्डियक सेंटर के प्रमुख प्रो. यशपाल शर्मा ने बताया कि 29 सितंबर को संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसमें हृदय रोग के रोगियों के प्रबंधन के लिए डिजिटल तकनीक और टेलीमेडिसिन/टेलीकार्डियोलॉजी का उपयोग करने के लिए हार्ट टू कनेक्ट/कनेक्ट टू प्रोटेक्ट का उपयोग करने की जानकारी दी जाएगी। क्योंकि कोरोना महामारी के दौर में यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
कोविड काल में पीजीआई में हृदय रोगियों का आंकड़ा- (2020 मार्च से 2021 मार्च)
कॉर्डियोलॉजी इमरजेंसी ओपीडी - 49611 मरीज
कॉर्डियो सर्जरी ओपीडी- 11497
कॉर्डियक सीसीयू में मौत- 299
कॉर्डियो सर्जरी में मौत- 90
कोविड काल में हृदय रोगियों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए पीजीआई ने टेलीकंसल्टेशन के साथ ही हेल्पलाइन के जरिए उन्हें परामर्श देने का कार्य जारी रखा। महामारी के बीच हृदय संबंधी मर्ज तेजी से बढ़ा है। जरूरी है कि अपने दिल को मजबूत बनाने के लिए उचित दिशा निर्देशों का पालन किया जाए। -प्रो. यशपाल शर्मा, प्रमुख, पीजीआई एडवांस कॉर्डियक सेंटर