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लॉकडाउन खुलने के बाद भी नहीं आया सुधार.. दर दर की ठोकरें खा रहे हैं मजदूर परिवार
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चंडीगढ़। लॉकडाउन खुलने के बाद भी कई मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। वह रोजगार के लिए भटक रहे हैं। आलम यह है कि वह अपने परिवार का गुजारा और मकान का किराया भी नहीं जुटा पा रहे हैं। लॉकडाउन के बाद चंडीगढ़ के हजारों मजदूरों का रोजगार छिन गया जिसके बाद मजदूरों को खाने तक के लाले पड़ गए। लेकिन अभी स्थिति में खास सुधार नहीं आया है।
लॉकडाउन ने छीना निशा का रोजगार, अब भी बेरोजगार
सेक्टर 52 निवासी निशा ने बताया कि वह मोहाली के एक मॉल में काम करती थी। लॉकडाउन लगने के बाद उसका रोजगार छिन गया। निशा ने बताया कि उसके पिता नहीं है। वह और उसका भाई विक्की अपनी मां और भाई बहनों का खर्च उठा रहे थे। नौकरी जाने के बाद वह काफी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। निशा ने बताया कि उसका भाई विक्की भी एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। लॉकडाउन के बाद वह भी बेरोजगार हो गया। घर में आय का कोई साधन नहीं है।
कैसे चलेगा घर का खर्चा, पति-पत्नी बेरोजगार
सेक्टर- 44 में काम करने वाली मेड शब्बो और गुड्डी ने बताया कि लॉकडाउन में उन्हें काम से निकाल दिया गया और आज तक वह काम की तलाश में हैं। उन्होंने बताया कि कुछ घरों से उन्हें मार्च महीने की सैलरी भी नहीं मिल पाई। उन्होंने बताया कि उनके पति मजदूरी का काम करते हैं उन्हें भी काम नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान संस्थाओं की तरफ से उन्हें खाना मिला जिसकी वजह से वह अपना जीवन जी सके। उनका कहना है कि आज भी उन्हें काम पर नहीं रखा जा रहा है।
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लॉकडाउन ने छीना निशा का रोजगार, अब भी बेरोजगार
सेक्टर 52 निवासी निशा ने बताया कि वह मोहाली के एक मॉल में काम करती थी। लॉकडाउन लगने के बाद उसका रोजगार छिन गया। निशा ने बताया कि उसके पिता नहीं है। वह और उसका भाई विक्की अपनी मां और भाई बहनों का खर्च उठा रहे थे। नौकरी जाने के बाद वह काफी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। निशा ने बताया कि उसका भाई विक्की भी एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। लॉकडाउन के बाद वह भी बेरोजगार हो गया। घर में आय का कोई साधन नहीं है।
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कैसे चलेगा घर का खर्चा, पति-पत्नी बेरोजगार
सेक्टर- 44 में काम करने वाली मेड शब्बो और गुड्डी ने बताया कि लॉकडाउन में उन्हें काम से निकाल दिया गया और आज तक वह काम की तलाश में हैं। उन्होंने बताया कि कुछ घरों से उन्हें मार्च महीने की सैलरी भी नहीं मिल पाई। उन्होंने बताया कि उनके पति मजदूरी का काम करते हैं उन्हें भी काम नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान संस्थाओं की तरफ से उन्हें खाना मिला जिसकी वजह से वह अपना जीवन जी सके। उनका कहना है कि आज भी उन्हें काम पर नहीं रखा जा रहा है।
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