फादर्स डे: हर कदम पर पिता ने दिया साथ तो आज दुनिया में नाम रोशन कर रहे ये खिलाड़ी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिता एक बरगद की पेड़ की तरह होता है, जो अपने बच्चे को हर सुख की छांव देता है। बेशक पिता अपनी औलाद की खुशियों के लिए कितने कष्ट झेल ले लेकिन बच्चों की चेहरे की खुशी देखकर पल भर में कष्ट को भूल जाता है। ऐसे ही कुछ पिता हैं जिन्होंने बच्चों को खेलने के टिप्स के साथ-साथ ऐसी कड़ी मेहनत करवाई कि आज वह इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहचान बना रहे हैं। सफलता के शिखर तक पहुंचने का सफर यह खिलाड़ी बिना अपने पिता की सहायता के पूरा नहीं कर सकते थे। आज ये खिलाड़ी फादर्स डे पर अपने पिता को सैल्यूट कर रहे हैं।
पिता की बदौलत यहां पहुंचा.. वही मेरे रोल मॉडल: अमान संधू
भारतीय बास्केटबॉल टीम में जगह बनाने वाले सबसे कम उम्र के युवा 17 वर्ष के अमान संधू के पिता गुरशरण सिंह संधू पंजाब पुलिस में डीएसपी हैं। वे इंटरनेशनल बास्केटबॉल खिलाड़ी भी रहे हैं। वहीं मां राजिंदर कौर प्रोफेसर हैं और स्टेट लेवल की बास्केटबॉल खिलाड़ी भी रही हैं। अमान अभी 11वीं कक्षा के छात्र हैं।
एनबीए अकादमी में चयन होते ही इंटरनेशनल लेवल पर पहुंच गए। अमान की लंबाई 7 फीट है। अमान ने बताया कि बचपन से ही उनके पिता उन्हें बास्केटबॉल का खिलाड़ी बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत कराई। उन्होंने कहा, ‘मेरे पिता मेरे रोल मॉडल हैं। उन्हीं की वजह से मैं आज इस मुकाम पर पहुंचा हूं।’
जब लोग सोते थे तो पिता कराते थे अभ्यास: हरसिमरन
हरसिमरन कौर पहली भारतीय महिला हैं जिन्हें एनबीए ग्लोबल अकादमी में पहुंचने का गौरव हासिल हुआ है। हरसिमरन 2019 में भारतीय महिला टीम की ओर से एशियन चैंपियनशिप में खेल चुकी हैं। हरसिमरन को इंटरनेशनल लेवल पर पहुंचाने में उनके पिता का अहम योगदान है। हरसिमरन का कहना है जब लोग सुबह सो रहे होते थे तो मेरे पिता ग्राउंड पर मुझे कड़ा अभ्यास करवाते थे। आज इस मुकाम तक पहुंचाने में पिता की कड़ी मेहनत काम आई हैं। वह 12वीं कक्षा की छात्रा हैं और कद 6 फीट 3 इंच हैं। इनके पिता सुखदेव सिंह रेल कोच फैक्ट्री में बास्केटबॉल कोच हैं।
बचपन में पिता के साथ जाता था गोल्फ क्लब, वहीं खेलना सीखा: आदिल
आदिल बेदी ने 7 वर्ष की उम्र से ही गोल्फ खेलना शुरू कर दिया था। अपने पिता हैरी बेदी के साथ चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में जाते थे, वहीं से इस खेल के प्रति लगाव हो गया। पहले घरेलू टूर्नामेंट में हिस्सा लेना शुरू किया। इसके बाद कड़ी मेहनत के चलते टूर्नामेंट को जीतने का सिलसिला शुरू किया। जल्द ही इंडियन गोल्फ यूनियन (आईजीयू) की मेरिट लिस्ट में पहले पायदान पर पहुंच गए।
इसके बाद देश और विदेश में अपनी काबलियत सिद्ध करते हुए आज मात्र 19 वर्ष की उम्र में प्रोफेशनल गोल्फर बन गए हैं। हैरी बेदी शुरू से ही नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के गोल्फ टूर्नामेंट में अपने बेटे आदिल बेदी के साथ ही रहते हैं। एक कैडी के रूप में पिता अपने बेटे को खेलने में मदद करते हैं।