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हाईकोर्ट का अहम आदेश: दुर्घटना के शिकार सैनिक के आश्रित भी अनुकंपा की नौकरी के हकदार, हरियाणा सरकार को आदेश

Tue, 30 Jul 2024 07:18 AM IST
निवेदिता वर्मा विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 30 Jul 2024 07:18 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि लाभकारी प्रावधान की व्याख्या अर्थपूर्ण और उदारतापूर्वक से की जानी चाहिए, ताकि उसका उद्देश्य पूरा हो न कि लाभार्थी को वंचित करने के लिए। उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्र में जहां जान को हमेशा खतरा बना रहता है वहां पर तैनात सैनिक द्वारा जिन कठोर वास्तविकताओं का सामना करना पड़ता है उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

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Important order of the High Court: Dependents of accident victims also entitled to compassionate employment
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि सैनिक यदि दुर्घटना के कारण अपनी ही बंदूक की गोली का शिकार हो जाता है और उसे युद्घ हताहत करार दिया जाता है तो उसके आश्रित एक्स ग्रेशिया राशि व अनुकंपा आधार पर नौकरी के हकदार होंगे। हाईकोर्ट ने दो माह के भीतर हरियाणा सरकार को यह दोनों लाभ जारी करने का आदेश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए जींद निवासी पुष्पलता ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके पति को 2001 में सेना में नियुक्ति मिली थी। 2006 में जम्मू-कश्मीर की सितनी फायरिंग रेंज नगोत्रा में संतरी की ड्यूटी कर रहे थे। अचानक हादसा हुआ और अपनी बंदूक से चली गोली के कारण उनकी मौत हो गई। इस मौत को युद्घ हताहत करार दिया गया और इसी के आधार पर आम्र्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल ने 2017 में याची को उदारीकृत परिवारिक पेंशन के लिए पात्र माना। इसके बाद याची ने एक्स ग्रेशिया राशि व अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए हरियाणा सरकार को आवेदन दिया। इस दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि यह लाभ केवल एक्टिव ऑपरेशन के दौरान मारे गए जवानों के लिए दिया जाता है। याची का पति हादसे के कारण चली गोली से मारा गया है ऐसे में उनका दावा नहीं टिकता।
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हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि लाभकारी प्रावधान की व्याख्या अर्थपूर्ण और उदारतापूर्वक से की जानी चाहिए, ताकि उसका उद्देश्य पूरा हो न कि लाभार्थी को वंचित करने के लिए। उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्र में जहां जान को हमेशा खतरा बना रहता है वहां पर तैनात सैनिक द्वारा जिन कठोर वास्तविकताओं का सामना करना पड़ता है उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि हमारी समझ के परे है कि सैनिकों के मामले मेंं मिलने वाले लाभ को अस्वीकार करने के लिए नीति को लागू करते समय तर्क को अतार्किक सीमाओं तक खींचा जा रहा है। अति कठोर माहौल में हथियार के आकस्मिक विस्फोट के कारण होने वाली मृत्यु, शांतिपूर्ण स्थान पर हुई उस तरह की घटना से बहुत अलग है। याची के पति की मौत को सक्षम प्राधिकारी द्वारा युद्ध हताहत करार दिया गया है। ऐसे में याची एक्स ग्रेशिया व अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए हकदार है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को दो माह में यह लाभ जारी करने का आदेश दिया है।
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