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इमीग्रेशन धोखाधड़ी मामला : आरोपी महिला का लिया प्रोडक्शन वारंट
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चंडीगढ़। इमीग्रेशन के नाम पर धोखाधड़ी करने के आरोप में सेक्टर-36 थाना पुलिस ने एक 41 वर्षीय महिला को प्रोडक्शन वारंट पर लेते हुए एक दिन का रिमांड हासिल किया है। महिला की पहचान खरड़ की पूजा महाजन के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार आरोपी पर पहले भी इमीग्रेशन के कई मामले चल रहे हैं। वह किसी मामले में बुड़ैल जेल में बंद थी।बीते चार मई को आपराधिक रूप से विश्वासघात, धोखाधड़ी और इमीग्रेशन एक्ट की धारा-24 के तहत यह मामला दर्ज किया था। सेक्टर-42सी की आई-अब्रोड एजुकेशन एवं इमीग्रेशन के संचालकों के खिलाफ यह मामला दर्ज हुआ। शिकायतकर्ता हरिंदर पाल सिंह धर्मकोट, मोगा के हैं। उन्होंने पूजा महाजन, लवीश महाजन, विवेक सैनी और गौरी मेहरा के खिलाफ यह शिकायत दर्ज करवाई थी।
शिकायतकर्ता ने एसएसपी को शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता स्टडी वीजा पर कनाडा जाना चाहता था और उसने इस इमीग्रेशन कंपनी से संपर्क किया था। दिसंबर 2019 में उन्होंने फाइल लगाई थी। 50 हजार रुपये फाइल चार्ज और साढ़े पांच लाख रुपये जीआईसी फीस भरी थी। किसी कारण उनका वीजा न लग पाने के लिए कुछ रकम वापस आ गई लेकिन कॉलेज फीस के रूप में इमीग्रेशन कंपनी के खाते में जमा करवाए करीब पांच लाख रुपये वापस नहीं किए गए।
पूरी फीस में से सिर्फ 250 डॉलर ही जमा करवाए
शिकायतकर्ता को पता चला कि कंपनी ने उनकी कॉलेज फीस में से सिर्फ 250 डॉलर ही जमा करवाए। इस कंपनी ने शिकायतकर्ता के दो साल खराब किए और एंबेसी में भी उनका रिकाॅर्ड खराब किया। इनके द्वारा बाकी रकम शिकायतकर्ता को वापस नहीं की। इनका दफ्तर भी बंद है।
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शिकायतकर्ता ने एसएसपी को शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता स्टडी वीजा पर कनाडा जाना चाहता था और उसने इस इमीग्रेशन कंपनी से संपर्क किया था। दिसंबर 2019 में उन्होंने फाइल लगाई थी। 50 हजार रुपये फाइल चार्ज और साढ़े पांच लाख रुपये जीआईसी फीस भरी थी। किसी कारण उनका वीजा न लग पाने के लिए कुछ रकम वापस आ गई लेकिन कॉलेज फीस के रूप में इमीग्रेशन कंपनी के खाते में जमा करवाए करीब पांच लाख रुपये वापस नहीं किए गए।
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पूरी फीस में से सिर्फ 250 डॉलर ही जमा करवाए
शिकायतकर्ता को पता चला कि कंपनी ने उनकी कॉलेज फीस में से सिर्फ 250 डॉलर ही जमा करवाए। इस कंपनी ने शिकायतकर्ता के दो साल खराब किए और एंबेसी में भी उनका रिकाॅर्ड खराब किया। इनके द्वारा बाकी रकम शिकायतकर्ता को वापस नहीं की। इनका दफ्तर भी बंद है।
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