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Chandigarh News: इमिग्रेशन कारोबार 90% तक ठप, ठगी और कड़े वीजा नियमों ने बिगाड़ी साख

Thu, 11 Dec 2025 02:43 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Dec 2025 02:43 AM IST
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Immigration business down 90%, fraud and stringent visa rules dent reputation
चंडीगढ़। वर्क वीजा, स्कूल वीजा और स्टूडेंट वीजा के नाम पर बढ़ती ठगी, वीजा रिजेक्शन में बेतहाशा बढ़ोतरी और बिना लाइसेंस चल रही इमिग्रेशन कंपनियों ने ट्राइसिटी के इमिग्रेशन बिजनेस को लगभग खत्म कर दिया है। इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह कारोबार 90 फीसदी तक चौपट हो चुका है। यदि धोखाधड़ी के मामले नहीं रुके तो स्थिति और खराब हो सकती है।
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पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार चंडीगढ़ में करीब 300 इमिग्रेशन कंपनियां सक्रिय हैं, जबकि कुछ साल पहले यह संख्या 2000 से अधिक थी। ज्यादातर कंपनियों का संचालन बिना लाइसेंस या फिर एक्सपायर लाइसेंस पर होता रहा जिन पर कार्रवाई न होने से फर्जीवाड़ा बढ़ता गया। लाइसेंस की मियाद खत्म होने पर कई कंपनियां रिन्यू करवाने की कोशिश भी नहीं करतीं, पर व्यवसाय चालू रखती हैं।
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कड़े वीजा नियम व डिपोर्टेशन भी बना बड़ा कारण
अमेरिका से भारतीयों को लगातार डिपोर्ट करना, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में वीजा पॉलिसी का सख्त होना इमीग्रेशन बिजनेस के गिरने में अहम भूमिका निभा रहा है। अब कई विकसित देश (यूएसए, कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया) केवल कुशल श्रमिकों और आर्थिक योगदान देने वालों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके साथ वीएफएस और अन्य आधिकारिक पोर्टलों से डायरेक्ट आवेदन का चलन बढ़ा है।
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अगस्त 2025 में चौंकाने वाले वीजा रिजेक्शन रेट
कनाडा: इंडियन स्टूडेंट्स का वीजा रिजेक्शन रेट 74%
ऑस्ट्रेलिया: पंजाब-हरियाणा के कई फर्जी दस्तावेज मामलों के कारण 24.3% रिजेक्शन
यूएसए: एफ-1 स्टूडेंट वीजा रिजेक्शन 41%, टूरिस्ट वीजा 20%
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं
एक समय था जब ट्राइसिटी इमिग्रेशन का हब था। ठगी और फ्रॉड ने भरोसा तोड़ दिया। अब यह बिजनेस केवल 10 फीसदी रह गया है। -गुरमुख सिंह वालिया, इमिग्रेशन कंसल्टेंट


डिपोर्टेशन, कड़े नियम और एजेंटों की ठगी ने इमीग्रेशन की विश्वसनीयता खत्म कर दी है। पहले ट्राइसिटी नाम पर भरोसा था, अब लोग संदेह करते हैं। -अजय कुमार, इमिग्रेशन कंसल्टेंट
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