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पंजाब का बड़ा मुद्दा: पंजाब के बॉर्डर एरिया में नहीं रुक रहा अवैध खनन, देश की सुरक्षा को खतरा बढ़ा
Tue, 09 Apr 2024 04:26 PM IST
निवेदिता वर्मा
अमर उजाला/संवाद, जालंधर/पठानकोट/रूपनगर (पंजाब)
अमर उजाला/संवाद, जालंधर/पठानकोट/रूपनगर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 09 Apr 2024 04:26 PM IST
सार
पंजाब सरकार के अनुसार रोपड़ में अवैध खनन के मामले में गत वर्ष अवैध खनन की 118 एफआईआर दर्ज की गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने पिछले 10 साल में अवैध खनन से जुड़ी सभी एफआईआर का ब्योरा पेश करने को कहा था।
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पंजाब में बढ़ा अवैध खनन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब में अवैध खनन से यहां की कई खड्डे खाली हो गईं हैं। अत्यधिक खनन के कारण अब इनसे रेत-बजरी निकालने की क्षमता खत्म हो चुकी है। कई नदियों का प्रवाह तक बदल गया है। पठानकोट में तो चक्की खड्ड पर बना रेलवे का ऐतिहासिक पुल अवैध खनन की भेंट चढ़ गया। इसी खड्ड पर वाहनों के लिए बना दूसरा पुल भी जर्जर होने के कारण कई महीने बंद रहा, जिसे हाल ही में मरम्मत के बाद खोला गया है।
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अवैध खनन का मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा और कोर्ट ने बॉर्डर एरिया में हो रहे अंधाधुंध अवैध खनन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। कोर्ट ने सरकार को उचित कदम उठाने के निर्देश भी दिए। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तीन साल पहले मुख्यमंत्री रहते हुए रहते हुए हवाई सर्वे कर पूरे दोआबा क्षेत्र में अवैध खनन का जायजा लिया था। इसके बाद एक टास्क फोर्स बनाई गई थी। बड़े पैमाने पर कार्रवाई भी हुई। कई मशीनें जब्त की गईं। अवैध खनन करने वालों पर केस भी दर्ज हुए, लेकिन कोई भी बड़ी मछली हाथ नहीं आई।
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पूरी कार्रवाई सिर्फ ठेकेदारों के कारिंदों तक ही सीमित रह गई। यही कारण है कि अवैध खनन में कोई कमी नहीं आई। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने रेत बजरी के दाम में कटौती की और सरकारी रेट तय किए। सरकार बदलने के बाद राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने भी बॉर्डर एरिया का दौरा कर इस विषय की ओर से प्रदेश सरकार का ध्यान खींचा था। इसके बाद आप सरकार ने नई नीति पेश की और दावा किया किया कि इससे अवैध भी रुकेगा और आमदनी भी बढ़ेगी। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। न तो रेत-बजरी के रेट कम हुए और न ही खनन रुका।
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बीएसएफ और सेना उठा चुकी है सवाल
बीएसएफ और सेना इससे पहले हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए कह चुकी है कि अवैध खनन के चलते सीमा के आस-पास गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढों के चलते रावी नदी अपनी दिशा बदल रही है। ऐसा होने से सीमा पर की गई तारबंदी के लिए बड़ा खतरा पैदा हो रहा है। इसके साथ ही यह गड्ढे आतंकवादियों व असामाजिक तत्वों के लिए पनाहगार साबित हो रहे हैं। खनन दिन-रात होने के चलते हर तरफ शोर रहता है और इस शोर का फायदा उठा कर ड्रोन सीमा सीमा पर करवाए जाते हैं और इससे नशा और हथियार भारत भेजे जाते हैं।
बीएसएफ की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा था कि कैसे देश की सुरक्षा को खतरे में डाला जा सकता है। इस पर पंजाब सरकार ने अपना जवाब कोर्ट में सौंपा था। हाईकोर्ट ने कहा था कि इस जवाब में पठानकोट व गुरदासपुर के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है। साथ ही पंजाब सरकार का जवाब भी स्पष्ट नहीं है कि इस क्षेत्र में अवैध खनन बंद हो गया है या नहीं। कोर्ट ने कहा था कि बीएसएफ की रिपोर्ट के अनुसार सैकड़ों मजदूर, जिनके बारे में पुलिस तक को जानकारी नहीं है, सरहद के पास रहे तो यह सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकती है। यह चिंता का विषय है। साथ ही ड्रोन के माध्यम से नशा तस्करी व हथियारों की सप्लाई को लेकर दी गई जानकारी पर भी हाईकोर्ट ने चिंता जताई थी। केंद्र सरकार ने बताया था कि अभी सेना की तरफ से रिपोर्ट आना बाकी है। हाईकोर्ट ने अब अगली सुनवाई पर पंजाब सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही केंद्र सरकार को भी अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
सरहद के पांच किलोमीटर में खनन के लिए नीति बनाने के दिए थे निर्देश
हाईकार्ट में सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने बताया था कि सरहदी क्षेत्रों को छोड़ कर अन्य सभी स्थानों पर विभिन्न मंजूरियों के बाद खनन का कार्य किया जा रहा है। बॉर्डर के पास के क्षेत्र में खनन के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मांगी गई है। केंद्र सरकार के पास पंजाब का यह आवेदन फिलहाल विचाराधीन है और अभी तक इस पर निर्णय नहीं लिया गया है। हाईकोर्ट ने कहा था कि बॉर्डर के पांच किलोमीटर के एरिया में खनन किया जा सकता है या नहींं तय होना चाहिए। यदि इसकी अनुमति मिलती है तो इसके लिए ठोस नीति तैयार की जानी चाहिए।
पठानकोट में माफिया ने खत्म कर दिए दोनों राज्यों को जोड़ने वाले कई रास्ते
पठानकोट के नंगलभूर क्षेत्र के पंजाब और हिमाचल को जोड़ने वाले गांव अंधोई में अवैध खनन जोरों से जारी है। इस वजह से पंजाब और हिमाचल की हदबंदी में काफी अवैध माइनिंग की गई है। दोनों राज्यों को जोड़ने वाले कई रास्ते अवैध माइनिंग माफिया ने खत्म कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार वह रोजाना अवैध रेत से भरे ओवरलोड टिप्परों से दुखी हो गए हैं। इसी वजह से कई रास्ते भी टूट गए हैं। प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता।
एनजीटी भी उठा चुका है सवाल
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया था। रूपनगर में 1735 घन मीटर उप खनिज का अवैध रूप से खनन किया गया था। इस मामले में एसडीएम शाह ने बताया था कि संयुक्त टीम के की पैमाइश पर पाया गया कि 1735 घन मीटर उप खनिज का अवैध रूप से खनन हुआ है। यह नोटिस कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की याचिका पर हुआ था। याचिका में सिद्धू ने अवैध खनन रोकने में असफल रहने के लिए पंजाब सरकार को भी दोषी ठहराते हुए अवैध खनन पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाने की मांग की थी। याचिका में सिद्धू ने यह भी कहा था कि पंजाब में
बड़े स्तर पर अवैध खनन जारी है और खनन साइटों में बड़ी संख्या में क्रशर और खनन संबंधी मशीनरी इस्तेमाल की जा रही है, जिससे नदी तल खिसकने का खतरा बढ़ गया है। अवैध खनन के कारण ही निकटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है और पर्यावरण पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
रोपड़ में सर्वाधिक अवैध खनन
रोपड़ में सर्वाधिक अवैध खनन हो रहा है। एक मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बढ़ते खनन मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट ने 10 साल में अवैध खनन के दर्ज सभी मामलों का ब्योरा पेश करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही अवैध माइनिंग की जमीनी स्तर पर जांच के लिए एडवोकेट वेणु गोपाल जोहर कोर्ट कमीशन नियुक्त किया और उन्हें सुरक्षा देने का सरकार को आदेश दिया है। कुलवीर सिंह ने अवैध खनन के मामले में दर्ज एफआईआर में जमानत देने की हाईकोर्ट से अपील की थी।
आप सरकार बुरी तरह विफल रही: बाजवा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप बाजवा ने कहा कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय राज्य में अवैध खनन पर अपनी चिंता व्यक्त कर चुके हैं। हालांकि, पंजाब में आप सरकार उनकी चिंताओं का पालन करने में बुरी तरह विफल रही है। विधानसभा चुनाव से पहले आप ने अवैध खनन को समाप्त करके पंजाब के राजस्व को 20,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई थी, लेकिन पंजाब सरकार अपने इस वादे को पूरा नहीं कर पाई है।
सरकार रोक लगाने के प्रति गंभीर नहीं: अश्विनी शर्मा
भारतीय जनता पार्टी पंजाब के पूर्व अध्यक्ष अश्विनी शर्मा के अनुसार आप सरकार प्रदेश के प्रमुख मुद्दों की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। इसमें माइनिंग का मामला भी शामिल है। पंजाब में माइनिंग माफिया सक्रिय है, लेकिन फिर भी सरकार इस पर रोक लगाने के प्रति गंभीर नहीं है। यही स्थिति रही तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो जाएगी। पठानकोट और गुरदासपुर में अवैध खनन चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुका है। इसे रोकने की जरूरत है।
स्वतंत्र जांच से सामने लाया जाए सच: मजीठिया
शिअद नेता बिक्रम सिंह मजीठिया का कहना है कि पंजाब में एक के बाद एक माइनिंग के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन कोई भी सवाल पूछने वाला नहीं है। यह सरासर सरकारी खजाने की लूट है, जिसके लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है। एक स्वतंत्र जांच से ही पंजाब में माइनिंग का पूरा सच लोगों के सामने आ सकता है। आप सरकार ने अवैध खनन रोकने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन जमीन पर वह इसे रोकन में पूरी तरह नाकाम रही है।
खैरा ने पूछा- कहां गए 19,700 करोड़
कांग्रेस विधायक सुखपाल खैहरा और आदमपुर से विधायक सुखविंदर कोटली ने सोमवार को जालंधर में प्रेसवार्ता में कहा कि सूबे में अवैध माइनिंग जोर शोर से चल रही है। पंजाब सरकार को सत्ता में आए 2 साल हो गए हैं और अब तक माइनिंग से 250 से 350 करोड़ रुपये आए हैं। खैहरा ने कहा है कि पंजाब सरकार बताए कि 19,700 करोड़ कहां चला गया। आप विधायक मंत्रियों से अवैध माइनिंग को लेकर हिस्सा ले रहे हैं। पंजाब सरकार ने कहा था कि वह 5.5 रुपये स्क्वायर फीट के हिसाब से रेत देंगे। आज के समय में टिप्पर 50 हजार से अधिक में मिल रहा है। माइनिंग से पंजाब सरकार को दो फीसदी पैसा आ रहा है, जबकि बाकी माफिया की जेब में जा रहा है। खैहरा ने कहा कि विधानसभा में सरकार ने किसी को बोलने नहीं दिया। वहां पर गुंडागर्दी की तरह बात करते हैं।