चंडीगढ़ में अतिक्रमण का जाल, कृषि भूमि पर धड़ल्ले से प्लॉट काट रहा भूमाफिया
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चंडीगढ़ प्रशासन भले ही दावा करे कि शहर में अब खेती की जमीन पर अवैध निर्माण बंद हो गए हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। शहर के पेरीफेरी में धड़ल्ले से निर्माण कार्य चल रहे हैं। कृषि भूमि पर प्लॉट काटे जा रहे हैं। रजिस्ट्री है नहीं तो जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) पर जमीन की खरीद-फरोख्त हो रही है। भूमाफिया के इस खेल में अधिकारी भी शामिल हैं।
लाल डोरे के बाहर के निर्माण के नियमित होने की चर्चाओं के बाद से इन इलाकों में भूमाफिया सक्रिय हैं और तेजी से प्लॉट काट रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खुड्डा अलीशेर में तेजी से जमीन की खरीद-फरोख्त चल रही है। यहां दो मरला से लेकर 10 मरला तक की जमीन बेची जा रही है। भूमाफिया ने इन जमीनों के दाम भी तय कर रखे हैं। यहां पर ढाई लाख से साढ़े तीन लाख रुपये प्रति मरला जमीन बेची जा रहा है।
कुछ जमीन खुड्डा अलीशेर में माधो कालोनी के पास हैं, जबकि कुछ जमीनें खुड्डा अलीशेर से कैंबवाला की तरफ जाती सड़क के किनारे हैं। यह जंगल की सीमा से महज कुछ दूरी पर हैं, जिसका काफी हिस्सा इको सेंसेटिव जोन में भी आता है। इन जमीनों की रजिस्ट्री नहीं है, लेकिन जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) पर ही जमीन खरीदने-बेचने का काम चल रहा है। बिजली और पानी का मीटर दिलाने में भी पैसों का खेल चल रहा है।
बुधवार तक खुड्डा अलीशेर के कई इलाकों में निर्माण कार्य चल रहा था। जब इस बारे में एस्टेट ऑफिस के इंफोर्समेंट विंग के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मंगलवार को उन्होंने खुड्डा अलीशेर में जांच की थी। इस दौरान उन्होंने पाया कि कई जगह अवैध निर्माण हो रहा था। इसमें से चार को तो गिरा दिया गया था लेकिन कई लोगों को निर्माण कार्य रोकने की हिदायत दी थी। हालांकि जब अमर उजाला ने बुधवार को खुड्डा अलीशेर का दौरा किया तो देखा कि वहां पर फिर से कई जगहों पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
लोगों ने बताया कि यहां ज्यादातर निर्माण कार्य रात के समय में होता है और सुबह होने तक सफेदी कर दी जाती है, ताकि निर्माण पुराना लगे। प्लॉट खरीदने की बात कह जब अमर उजाला ने एक भूमाफिया से बात की तो उसने सिर्फ जमीन बेचने तक की ही जिम्मेदारी नहीं ली, बल्कि प्रशासन के नोटिस से बचाने का भी दावा किया। भूमाफियाओं का यह आत्मविश्वास बताता है कि इस पूरे खेल में प्रशासन के अधिकारी भी मिले हुए हैं।
ट्राइसिटी में नौकरी करने वाले हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह चंडीगढ़ में घर ले। चंडीगढ़ में जमीन महंगी होने की वजह से वह चंडीगढ़ के पास के हिस्सों में जमीन ढूंढता है। ऐसे लोगों की ताक में ही भूमाफिया बैठे हैं, जो चंडीगढ़ से आधे से एक किलोमीटर की दूरी पर घर दिलाने का वादा करते हैं और फिर चंडीगढ़ के सबसे पास की खेत की जमीन को खरीद कर वहां प्लॉट काटने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
हैरानी की बात है कि मलोया और पंजाब के झामपुर के बीच चंडीगढ़ की सीमा पर लॉकडाउन के दौरान पूरी कालोनी बस गई है। लॉकडाउन से पहले जहां लहलहाते खेत दिखाई देते थे, आज वहां पर दर्जनों की संख्या में एक व दो मंजिला मकान खड़े हो गए हैं। सैटेलाइट तस्वीरें इस बात की गवाह है कि कैसे चंडीगढ़ के पास बसने की चाहत में गैरकानूनी कार्य हो रहे हैं।
अवैध निर्माण हो रहा है, तो कार्रवाई करेंगे
हम जांच करते हैं। अगर कोई अवैध निर्माण कार्य होता दिखाई देता है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। खुड्डा अलीशेर के साथ पंजाब के कई इलाके भी हैं, उस साइड भी कुछ निर्माण हो रहे हैं। हालांकि अगर खुड्डा अलीशेर में कोई अवैध निर्माण हो रहा है तो मैं खुद वहां जाकर जांच करूंगा। - हरजीत सिंह संधू, एसडीएम सेंट्रल