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Hindi News ›   Chandigarh ›   If you have Haryana residence documents then you cannot get admission in medical from Punjab quota: High CourtIf you have Haryana residence documents then you cannot get admission in medical from Punjab quota: High Court

हरियाणा निवास के दस्तावेज तो पंजाब कोटे से मेडिकल में नहीं मिल सकता दाखिला : हाईकोर्ट

Fri, 29 Aug 2025 09:07 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 29 Aug 2025 09:07 PM IST
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If you have Haryana residence documents then you cannot get admission in medical from Punjab quota: High CourtIf you have Haryana residence documents then you cannot get admission in medical from Punjab quota: High Court
अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम आदेश में यह स्पष्ट कर दिया कि कोई भी छात्र अपने आधिकारिक दस्तावेजों में यदि स्वयं को हरियाणा निवासी घोषित करता है, तो वह बाद में पंजाब कोटे से प्रवेश पाने का दावा नहीं कर सकता। एक व्यक्ति को एक साथ दो विपरीत बातें करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
याचिकाकर्ता छात्र लवजीत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर यह मांग की थी कि उसे बीवीएससी एंड एएच (बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंडरी) कोर्स में पंजाब की सामान्य श्रेणी (जनरल कैटेगरी) कोटे से दाखिला दिया जाए। छात्र का तर्क था कि उसने पूरी शिक्षा पंजाब में प्राप्त की है, इसलिए उसे पंजाब का उम्मीदवार माना जाना चाहिए।
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मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की दलील ठुकराते हुए कहा कि उसने स्वयं आवेदन पत्र में यह दर्ज किया है कि वह न तो पंजाब और न ही चंडीगढ़ का निवासी है। आवेदन पत्र में उसने स्पष्ट रूप से हरियाणा का स्थायी निवासी लिखा है। हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब याचिकाकर्ता ने लगातार स्वयं को हरियाणा का निवासी बताया है तो वह अब पलटकर यह दावा नहीं कर सकता कि उसे पंजाब निवासी मानकर प्रवेश दिया जाए।
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याचिकाकर्ता को एक साथ दो परस्पर विरोधी दावे करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि छात्र का नीट एडमिट कार्ड भी स्पष्ट रूप से उसे हरियाणा कोटे में पात्र दर्शाता है इसलिए पंजाब निवासी माने जाने का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि छात्र की याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है और यह सिर्फ दोहरा लाभ लेने की कोशिश है। अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

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