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Chandigarh News: पैडल मार रहे हैं तो घुटनों का भी रखें ख्याल, सीट की ऊंचाई न बिगाड़ दे चाल
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चंडीगढ़। साइकिल चलाना सेहत के लिए फायदेमंद है लेकिन गलत तरीके से साइकिल चलाना घुटनों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। पीजीआई के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. विजय जी. गोनी ने बताया कि सीट बहुत नीचे रखकर साइकिल चलाने से पैडल मारते समय घुटनों को बार-बार 90 डिग्री से ज्यादा मोड़ना पड़ सकता है। इससे घुटनों पर अनावश्यक जोर पड़ता है। सीट की ऊंचाई ऐसी होनी चाहिए कि पैडल नीचे होने पर पैर जरूरत से ज्यादा न सिकुड़े और शरीर की मुद्रा भी सही बनी रहे।
आईटी पार्क के द ललित होटल में चल रहे जोड़ प्रत्यारोपण संबंधी आर्थोप्लास्टी कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने घुटनों को सुरक्षित रखने के साथ जोड़ प्रत्यारोपण में आधुनिक तकनीक पर भी चर्चा की। प्रो. गोनी ने कहा कि लंबे समय तक साइकिल चलाने वालों को सीट की ऊंचाई, शरीर की सही स्थिति और पैडल चलाने के तरीके पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आर्थोपेडिक सर्जरी अब केवल जोड़ बदलने तक सीमित नहीं है। मरीज का सही चयन, जरूरत के अनुसार उपचार की योजना, सटीक सर्जरी और ऑपरेशन के बाद बेहतर रिकवरी पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है। नेविगेशन और रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।
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सम्मेलन का उद्घाटन पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और एआई डॉक्टरों की मदद कर सकते हैं, लेकिन चिकित्सा में मानवीय संवेदनशीलता, करुणा और मरीज के प्रति जिम्मेदारी का महत्व हमेशा बना रहेगा। सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान समेत देश-विदेश के विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।
लाइव सर्जरी से हाथों के प्रशिक्षण तक
तीन दिवसीय सम्मेलन में लाइव सर्जिकल डेमोंस्ट्रेशन, कैडेवर वर्कशॉप और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग कराई जा रही है। युवा सर्जनों और प्रशिक्षुओं को मैनुअल के साथ रोबोटिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दूसरे दिन टोटल नी रिप्लेसमेंट, पर्सनलाइज्ड अलाइनमेंट, हिप रिप्लेसमेंट, डायरेक्ट एंटीरियर अप्रोच और यूनिकॉम्पार्टमेंटल नी आर्थोप्लास्टी पर चर्चा हुई। प्रो. गोनी ने कहा कि अलग-अलग संस्थानों और विशेषज्ञताओं के डॉक्टरों को एक मंच पर लाने से जटिल मामलों पर चर्चा और अनुभव साझा करने का अवसर मिल रहा है।
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आईटी पार्क के द ललित होटल में चल रहे जोड़ प्रत्यारोपण संबंधी आर्थोप्लास्टी कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने घुटनों को सुरक्षित रखने के साथ जोड़ प्रत्यारोपण में आधुनिक तकनीक पर भी चर्चा की। प्रो. गोनी ने कहा कि लंबे समय तक साइकिल चलाने वालों को सीट की ऊंचाई, शरीर की सही स्थिति और पैडल चलाने के तरीके पर ध्यान देना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि आर्थोपेडिक सर्जरी अब केवल जोड़ बदलने तक सीमित नहीं है। मरीज का सही चयन, जरूरत के अनुसार उपचार की योजना, सटीक सर्जरी और ऑपरेशन के बाद बेहतर रिकवरी पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है। नेविगेशन और रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।
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सम्मेलन का उद्घाटन पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और एआई डॉक्टरों की मदद कर सकते हैं, लेकिन चिकित्सा में मानवीय संवेदनशीलता, करुणा और मरीज के प्रति जिम्मेदारी का महत्व हमेशा बना रहेगा। सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान समेत देश-विदेश के विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।
लाइव सर्जरी से हाथों के प्रशिक्षण तक
तीन दिवसीय सम्मेलन में लाइव सर्जिकल डेमोंस्ट्रेशन, कैडेवर वर्कशॉप और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग कराई जा रही है। युवा सर्जनों और प्रशिक्षुओं को मैनुअल के साथ रोबोटिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दूसरे दिन टोटल नी रिप्लेसमेंट, पर्सनलाइज्ड अलाइनमेंट, हिप रिप्लेसमेंट, डायरेक्ट एंटीरियर अप्रोच और यूनिकॉम्पार्टमेंटल नी आर्थोप्लास्टी पर चर्चा हुई। प्रो. गोनी ने कहा कि अलग-अलग संस्थानों और विशेषज्ञताओं के डॉक्टरों को एक मंच पर लाने से जटिल मामलों पर चर्चा और अनुभव साझा करने का अवसर मिल रहा है।