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Chandigarh News: अगर मेरे मां बाप दहेज दे देंगे तो क्या मेरी मनहूसियत हट जाएगी

Wed, 10 Sep 2025 12:02 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Sep 2025 12:02 AM IST
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If my parents give me dowry, will my bad luck go away?

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चंडीगढ़। अगर मेरे मां बाप दहेज दे देंगे तो क्या मेरी मनहूसियत हट जाएगी। यह कैसी परंपरा है जिसका पालन सदियों से हम छोरियों के साथ कर रहे हैं। यह संवाद मीठी की भूमिका में खुशी रावत ने सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में मंगलवार को नाटक मुझे पंख दे दो में मंचन के दौरान कहे। जबकि दहेज न दिए जाने के कारण उस लड़की का गौना नहीं हो रहा होता। साथ ही मास्टर जी की भूमिका में संगीता गुप्ता का यह संवाद मैं इसलिए तो आया हूं, शिक्षा की रोशनी से अज्ञानता के अंधेरे को मिटाने।
सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में इंपैक्ट आर्टेस की ओर से 12वां शगूफे के तहत 10 दिवसीय राष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव के पहले दिन मंगलवार को नाटक मुझे पंख दे दो का मंचन हुआ। नाटक का मंचन रूपक कला एवं वेलफेयर सोसाइटी के कलाकारोें ने किया। यह नाटक रूसी उपन्यास पहला अध्यापक पर आधारित है। नाटक का डिजाइन और निर्देशन संगीता गुप्ता ने किया है।
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नाटक की नायिका इच्छा एक छोटे से गांव में रहती है। इस गांव में लड़कियों के पढ़ने का चलन नहीं है। गांव में कोई स्कूल भी नहीं है। एक इंसान पढ़ाने के लिए आता है। वह घर-घर जाकर बच्चियों को इकट्ठा करता है। इच्छा पढ़ने में होशियार है उसकी आगे की पढ़ाई का इंतजाम करने मास्टर शहर जाता है।
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वह चाचा चाची के साथ रहती है। जैसे ही इच्छा की चाची को पता चलता है कि वह पढ़ने के लिए शहर जा रही है तो वह उसकी शादी एक अधेड़ उम्र के जमींदार से कर देती है। मास्टर शहर से आ जाता है और शादी को रोकने की कोशिश करता है। जमीदार के गुंडे उसे मार कर फेंक देते हैं और वह इच्छा को ब्याह कर अपने महल में ले जाता है।
कुछ दिनों में ही इच्छा वहां से भाग जाती है। उधर मास्टर की जान भी बच जाती है। वह इच्छा को बचाने के लिए जमीदार के घर की तरफ आ रहा होता है। रास्ते में इच्छा और मास्टर मिलते हैं। इच्छा मास्टर से अपने दिल की बात कहती है कि वह उसी से पढ़ना चाहती है और उससे प्रेम करती है।
मास्टर उसे समझाकर पढ़ने के लिए शहर भेज देता है। वह कड़ी मेहनत से पढ़ाई कर कलक्टर बन अपने गांव में हाई स्कूल का उद्घाटन करने आई है। यहां पर आज भी मास्टर जी एक डाकिए का काम करते हैं। वह उस बूढ़े डाकिए में से अपने मास्टर जी को पहचान लेती है। पूरे गांव के सामने अपने पहले अध्यापक का सम्मान करती है।

नाटक में संगीता गुप्ता, रेया शर्मा, गुरलीन कौर, खुशबू वर्मा, खुशी रावत, अन्विता, साइना, सिमरन, सानवी, रमनदीप कौर, अमीरुप ढिल्लों, हिना शर्मा, श्री, दीया, जैसमिन, नैना, इश्मिन, साहिन मलिक, कृतिका, रुपिंदर, किरण, नंदनी, मनजोत कौर, प्रियंका, प्रियांशु, सिमरन, प्रीति, चांदनी ने अभिनय किया।
दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का हौसला बढ़ाया। नाटक के बीच में गीत भी रहे।
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