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सिप्पी हत्याकांडः सुखमनप्रीत की मां बोली- बेटे को इंसाफ दिलाऊंगी, सुप्रीम कोर्ट ही क्यों न जाना पड़े
Mon, 21 Sep 2020 01:09 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2020 01:09 PM IST
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सुखमनप्रीत सिंह की मां और भाई
- फोटो : अमर उजाला
नेशनल शूटर सुखमनप्रीत सिंह उर्फ सिप्पी हत्या मामले को पांच साल बीत जाने के बावजूद हत्यारे आजाद घूम रहे हैं। रविवार को सेक्टर-27 स्थित हत्या वाली जगह पर परिजनों और रिश्तेदारों ने कैंडल मार्च निकालकर सिप्पी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान परिजनों के जख्म एक बार फिर से हरे हो गए।
सिप्पी की मां दीपिंदर कौर की आंखें अपने बेटे की याद में नम थीं। रोते हुए उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस ने पूरा केस गोलमोल कर दिया था लेकिन सीबीआई जांच पर उनको पूरा भरोसा है। लेकिन अगर सीबीआई भी उन्हें इंसाफ नहीं दिला पाई तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पांच साल से अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए उस घड़ी का इंतजार कर रही हूं, जब उसे न्याय मिलेगा।
इस मौके पर सिप्पी के परिजनों समेत अन्य रिश्तेदार भी मौजूद थे। सिप्पी के छोटे भाई जिप्पी सिद्धू का आरोप है कि आईजी, एसएसपी हमेशा मामले में कार्रवाई को लेकर बात टालते रहे। पुलिस के पास पुख्ता सबूत होने के बावजूद हाई प्रोफाइल मामला होने पर भी कार्रवाई नहीं की गई। इससे साफ हो गया कि यूटी पुलिस दबाव में चुप हो गई। उन्होंने दावा किया कि सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सिप्पी के हत्या के वक्त लड़की के साथ होने के पुख्ता सबूत हैं। यदि वह लड़की सिप्पी के साथ नहीं थी तो पेश होकर अपनी बात को स्पष्ट करें।
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गौरतलब है कि सिप्पी सिद्धू का शव 20 सितंबर 2015 की रात सेक्टर-27 के नेबरहुड पार्क के पास मिला था। सिप्पी की हत्या चार गोलियां मारकर की गई थी। 22 जनवरी 2016 को यूटी पुलिस ने जिला अदालत में बताया कि मामला सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया है। सीबीआई ने 13 अप्रैल 2016 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी थी। कत्ल के बाद पहले यूटी पुलिस ने एसआईटी बनाकर जांच शुरू की थी।
एसआईटी जांच फेल साबित हुई। इसके बाद केस सीबीआई को ट्रांसफर किया गया था। सिप्पी के परिवार वालों ने राजस्थान की एक जज की बेटी पर आरोप लगाए थे। उससे पूछताछ के लिए सीबीआई ने दिल्ली हेडक्वार्टर से इजाजत मांगी थी। हेडक्वार्टर से हरी झंडी मिली थी। इसके बाद उससे पूछताछ भी की गई लेकिन सीबीआई मामलं में कुछ भी सामने लाने में विफल रही है।
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सिप्पी की मां दीपिंदर कौर की आंखें अपने बेटे की याद में नम थीं। रोते हुए उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस ने पूरा केस गोलमोल कर दिया था लेकिन सीबीआई जांच पर उनको पूरा भरोसा है। लेकिन अगर सीबीआई भी उन्हें इंसाफ नहीं दिला पाई तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पांच साल से अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए उस घड़ी का इंतजार कर रही हूं, जब उसे न्याय मिलेगा।
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इस मौके पर सिप्पी के परिजनों समेत अन्य रिश्तेदार भी मौजूद थे। सिप्पी के छोटे भाई जिप्पी सिद्धू का आरोप है कि आईजी, एसएसपी हमेशा मामले में कार्रवाई को लेकर बात टालते रहे। पुलिस के पास पुख्ता सबूत होने के बावजूद हाई प्रोफाइल मामला होने पर भी कार्रवाई नहीं की गई। इससे साफ हो गया कि यूटी पुलिस दबाव में चुप हो गई। उन्होंने दावा किया कि सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सिप्पी के हत्या के वक्त लड़की के साथ होने के पुख्ता सबूत हैं। यदि वह लड़की सिप्पी के साथ नहीं थी तो पेश होकर अपनी बात को स्पष्ट करें।
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गौरतलब है कि सिप्पी सिद्धू का शव 20 सितंबर 2015 की रात सेक्टर-27 के नेबरहुड पार्क के पास मिला था। सिप्पी की हत्या चार गोलियां मारकर की गई थी। 22 जनवरी 2016 को यूटी पुलिस ने जिला अदालत में बताया कि मामला सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया है। सीबीआई ने 13 अप्रैल 2016 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी थी। कत्ल के बाद पहले यूटी पुलिस ने एसआईटी बनाकर जांच शुरू की थी।
एसआईटी जांच फेल साबित हुई। इसके बाद केस सीबीआई को ट्रांसफर किया गया था। सिप्पी के परिवार वालों ने राजस्थान की एक जज की बेटी पर आरोप लगाए थे। उससे पूछताछ के लिए सीबीआई ने दिल्ली हेडक्वार्टर से इजाजत मांगी थी। हेडक्वार्टर से हरी झंडी मिली थी। इसके बाद उससे पूछताछ भी की गई लेकिन सीबीआई मामलं में कुछ भी सामने लाने में विफल रही है।