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हरियाणा IAS एसएन रॉय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका खारिज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 19 Apr 2016 08:41 PM IST
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हरियाणा आईएएस एसएन रॉय के खिलाफ यौन शोषण केस
- फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा के आईएएस अधिकारी एसएन रॉय के खिलाफ सेशन कोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिका अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दी। इससे पहले निचली अदालत में दायर आपराधिक शिकायत पिछले साल नवंबर में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट से भी खारिज हो चुकी है।
महिला ने पुनर्विचार याचिका में रॉय के ड्राइवर को भी प्रतिवादी बनाया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि निचली अदालत ने तथ्यों को जांचे बिना उनकी शिकायत को रद्द कर दिया। महिला के वकील के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत रेप के मामले में विक्टिम की शिकायत पर पुलिस को फौरन केस दर्ज करना होता है। साथ ही आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी करनी होती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। शिकायत देने के महीनों बाद भी केस दर्ज नहीं हुआ।
हरियाणा कैडर के 1987 बैच के आईएएस अधिकारी एसएन रॉय के खिलाफ पंचकूला निवासी महिला ने यौन शोषण और धमकाने की शिकायत दायर की थी। इससे पहले पीड़िता की सीआरपीसी 156 (3) के तहत दायर अर्जी भी इसी कोर्ट ने खारिज कर दी थी। इसमें उसने कोर्ट से एसएन रॉय और उनके ड्राइवर तकदीर सिंह के खिलाफ दुष्कर्म, अपहरण, धमकाने और आपराधिक साजिश के तहत संबंधित धाराओं में केस दर्ज करने के लिए पुलिस को आदेश देने की अपील की थी।
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ये है मामला
पंचकूला निवासी महिला ने 1987 बैच के हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एसएन रॉय पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। महिला का कहना था कि उक्त अधिकारी से उसकी बातचीत लंबे अरसे से थी। आरोप के अनुसार अधिकारी लंबे समय से उसे शादी का झांसा देकर गुमराह कर रहा था। महिला ने कहा था कि वह सोनीपत निवासी सुरेंद्र पंवार के जरिए 2008 में रॉय से मिली थी। उस समय उसका पति से तलाक का केस चल रहा था।
रॉय ने उसकी इस केस में मदद की थी। राय ने उन्हें कहा था कि वह तलाकशुदा है। इसलिए उससे उन्हें शादी करने मे कोई परेशानी भी नहीं होगी। पीड़िता का यह भी आरोप था कि उसका दो बार गर्भपात भी करवाया गया था। पीड़िता के मुताबिक रॉय बाद में शादी से मुकर गया और उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी थी। पीड़िता ने पिछले साल अप्रैल में भी आईजी, हरियाणा के गवर्नर और सेक्टर-19 के थाने में शिकायत दी थी।
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महिला ने पुनर्विचार याचिका में रॉय के ड्राइवर को भी प्रतिवादी बनाया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि निचली अदालत ने तथ्यों को जांचे बिना उनकी शिकायत को रद्द कर दिया। महिला के वकील के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत रेप के मामले में विक्टिम की शिकायत पर पुलिस को फौरन केस दर्ज करना होता है। साथ ही आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी करनी होती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। शिकायत देने के महीनों बाद भी केस दर्ज नहीं हुआ।
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हरियाणा कैडर के 1987 बैच के आईएएस अधिकारी एसएन रॉय के खिलाफ पंचकूला निवासी महिला ने यौन शोषण और धमकाने की शिकायत दायर की थी। इससे पहले पीड़िता की सीआरपीसी 156 (3) के तहत दायर अर्जी भी इसी कोर्ट ने खारिज कर दी थी। इसमें उसने कोर्ट से एसएन रॉय और उनके ड्राइवर तकदीर सिंह के खिलाफ दुष्कर्म, अपहरण, धमकाने और आपराधिक साजिश के तहत संबंधित धाराओं में केस दर्ज करने के लिए पुलिस को आदेश देने की अपील की थी।
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ये है मामला
पंचकूला निवासी महिला ने 1987 बैच के हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एसएन रॉय पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। महिला का कहना था कि उक्त अधिकारी से उसकी बातचीत लंबे अरसे से थी। आरोप के अनुसार अधिकारी लंबे समय से उसे शादी का झांसा देकर गुमराह कर रहा था। महिला ने कहा था कि वह सोनीपत निवासी सुरेंद्र पंवार के जरिए 2008 में रॉय से मिली थी। उस समय उसका पति से तलाक का केस चल रहा था।
रॉय ने उसकी इस केस में मदद की थी। राय ने उन्हें कहा था कि वह तलाकशुदा है। इसलिए उससे उन्हें शादी करने मे कोई परेशानी भी नहीं होगी। पीड़िता का यह भी आरोप था कि उसका दो बार गर्भपात भी करवाया गया था। पीड़िता के मुताबिक रॉय बाद में शादी से मुकर गया और उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी थी। पीड़िता ने पिछले साल अप्रैल में भी आईजी, हरियाणा के गवर्नर और सेक्टर-19 के थाने में शिकायत दी थी।