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डॉक्टरी की पहली ही क्लास में कोरोना से हो गया मुकाबला, जीत मुझे मिली

Thu, 04 Jun 2020 09:36 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 04 Jun 2020 09:36 PM IST
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I got a fight against Corona in the first class of doctor, I won
डॉ अभिषेक। - फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। डॉक्टर बनने का सोचा तब कभी यह ख्याल नहीं आया कि मरीजों का इलाज शुरू करने के साथ मैं खुद कोरोना जैसी बीमारी की चपेट में आ जाऊंगा। डॉक्टरी के पहले क्लास में ही मेरी और कोरोना की जंग हो गई।
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एक डॉक्टर होने के नाते मैंने बचाव के सारे मानकों का सावधानी से पालन किया। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और सहयोगियों के प्यार की बदौलत कोरोना पर जीत दर्ज कर ली और चंद दिनों के बाद ही पूरी तरह ठीक होकर दोबारा मरीजों का इलाज कर रहा हूं। यह कहना है जीएमएसएच-16 के डॉक्टर अभिषेक चौहान का। अभिषेक ने 26 अप्रैल को हॉस्पिटल में ज्वाइन किया था। इमरजेंसी में कोरोना पॉजिटिव मरीज के इलाज करने के दौरान 12 मई को खुद भी इसकी चपेट में आ गए।
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घरवालों को नहीं दी इसकी सूचना
अभिषेक ने बताया कि जीएमएसएच-16 में नौकरी लगने के बाद रुड़की से घर वालों ने तमाम उम्मीदें लगाकर मुझे चंडीगढ़ भेजा। उस वक्त देशभर में कोरोना महामारी तेजी से फैल रही थी। मैंने भी अपने मन का डर दरकिनार किया और चल पड़ा अपने फर्ज को पूरा करने की ओर। 26 अप्रैल को नौकरी ज्वाइन की और इमरजेंसी में मरीजों का इलाज करने लगा। 12 मई को एक मरीज का इलाज किया, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उसके संपर्क में आने के बाद मुझे भी कोरोना हो गया। रिपोर्ट में कोरोना संक्रमित होने की सूचना पर मैं अंदर से थोड़ा डर गया बड़े। मेरे बड़े भैया जो रुड़की सिविल हॉस्पिटल में डॉक्टर हैं, उनको इसकी जानकारी दी। उन्होंने मुझे हिम्मत दी और कहा कि यह ऐसी कोई बीमारी नहीं है, जिससे डरा जाए। उन्होंने मुझे घर वालों को इसकी जानकारी देने से साफ मना कर दिया। उस वक्त मुझे उनकी बातें थोड़ी अजीब लगीं, लेकिन बाद में समझ में आया कि मैं अगर उस वक्त घर वालों को खुद के कोरोना ग्रस्त होने की सूचना देता तो वह कितने तनाव में आ जाते। भैया की समझदारी के कारण ही मैंने अपने घरवालों को तनाव से बचाया।
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थोड़ी समझदारी और सजगता जरूरी
कोरोना की चपेट में आए मरीजों को डरने की जरूरत नहीं है। एक डॉक्टर और कोरोना पॉजिटिव का अनुभव मिलने के बाद मुझे एक बात अच्छी तरह समझ आ गई कि ऐसी बीमारियों से बचाव के लिए थोड़ी सी समझदारी के साथ सजगता बेहद जरूरी है। डॉ. अभिषेक ने बताया की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें पीजीआई भेजा जा रहा था। उस दौरान उन्होंने अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ वीके नागपाल से उन्हें जीएमएसएच-16 में ही रहने की अनुमति देने का अनुरोध किया। डॉ. नागपाल ने उनका अनुरोध मान लिया और उन्होंने हर तरह से मेरा सहयोग किया। अस्पताल प्रशासन के साथ ही सहयोगियों और अन्य स्टाफ का प्यार और साथ मिला, जिससे कोरोना से मेरी लड़ाई बेहद आसान हो गई और मैं 28 मई को ठीक हो गया। एक जून से फिर से नौकरी ज्वाइन कर ली और मरीजों का इलाज शुरू कर दिया है। उन्होंने संदेश दिया कि कोरोना ऐसी बीमारी नहीं, जिससे जिंदगी की रफ्तार रुक जाए।
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