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पति पत्नी के साथ परिवार के बड़े भी उतरे कोरोना से जंग में
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पीजीआई नर्सिंग ऑफिसर किशोर सैनी कोरोना मरीजों के बीच कर रहे ड्यूटी, उनकी पत्नी राजस्थान में क्वारंटाइन टीम की हैं सदस्य
फोटो सहित
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पीजीआई नर्सिंग ऑफिसर किशोर सैनी कोरोना पॉजिटिव मरीजों के बीच ड्यूटी कर रहे हैं तो उनकी पत्नी राजस्थान में क्वारंटाइन टीम की सदस्य हैं। इतना ही नहीं किशोर के पिताजी और ससुर भी क्वारंटाइन टीम के साथ मिलकर कोरोना के मरीजों से जुड़े कार्य कर रहे हैं। इस परिवार के लिए इस समय कोरोना महामारी से बचाव के साथ ही निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य को पूरा करना सबसे अहम जिम्मेदारी है।
किशोर पिछले 3 महीने से अपने दोनों बच्चों और परिवार से दूर हैं। उनका कहना है कि परिवार से दूर रहने का दुख तो है, लेकिन इस बात की खुशी है कि वह अपने फर्ज को पूरी ईमानदारी से निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे एक ऐसे परिवार से हैं जहां घर परिवार की चिंता किए बिना अपने देश पर बलिदान होने की सीख बचपन से दी जाती है।
बॉक्स
देश की फिक्र के आगे भूल गए अपना दर्द किशोर को किडनी में स्टोन है जिसके कारण उन्हें भयंकर दर्द होता है। लेकिन कोरोना वार्ड में ड्यूटी करने के दौरान पथरी के दर्द को भूल जाते हैं। किशोर ने बताया कि शुरुआती दौर में जब कोविड-19 हॉस्पिटल में ड्यूटी के लिए लिस्ट बनाई गई थी तब उसमें उनका नाम नहीं था। उन्होंने तत्काल प्रशासन से बात की और कोविड-19 में काम करने की इच्छा जताकर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाया। किशोर का कहना है कि कोरोना महामारी के दंश के आगे पथरी का दर्द कुछ भी नहीं है।
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बच्चों को मायके छोड़ मां कर रही ड्यूटी
किशोर ने बताया कि उनकी पत्नी प्रियंका दोनों बच्चों हितांशी और रेयांश को मायके में छोड़कर क्वारंटाइन टीम के साथ लगभग डेढ़ महीने से लगातार ड्यूटी कर रही हैं। माता-पिता से दूर होने के कारण दोनों बच्चे दुखी तो हैं, लेकिन वह अपने नानी के साथ मिलकर हम सब का मनोबल बढ़ाते हैं। जब भी मैं उन्हें फोन करता हूं वह मुझसे बस यही कहते हैं पापा कोरोना को जल्दी से खत्म करके नानी के घर आओ और हमें वापस चंडीगढ़ लेकर जाओ।
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माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पीजीआई नर्सिंग ऑफिसर किशोर सैनी कोरोना पॉजिटिव मरीजों के बीच ड्यूटी कर रहे हैं तो उनकी पत्नी राजस्थान में क्वारंटाइन टीम की सदस्य हैं। इतना ही नहीं किशोर के पिताजी और ससुर भी क्वारंटाइन टीम के साथ मिलकर कोरोना के मरीजों से जुड़े कार्य कर रहे हैं। इस परिवार के लिए इस समय कोरोना महामारी से बचाव के साथ ही निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य को पूरा करना सबसे अहम जिम्मेदारी है।
किशोर पिछले 3 महीने से अपने दोनों बच्चों और परिवार से दूर हैं। उनका कहना है कि परिवार से दूर रहने का दुख तो है, लेकिन इस बात की खुशी है कि वह अपने फर्ज को पूरी ईमानदारी से निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे एक ऐसे परिवार से हैं जहां घर परिवार की चिंता किए बिना अपने देश पर बलिदान होने की सीख बचपन से दी जाती है।
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देश की फिक्र के आगे भूल गए अपना दर्द किशोर को किडनी में स्टोन है जिसके कारण उन्हें भयंकर दर्द होता है। लेकिन कोरोना वार्ड में ड्यूटी करने के दौरान पथरी के दर्द को भूल जाते हैं। किशोर ने बताया कि शुरुआती दौर में जब कोविड-19 हॉस्पिटल में ड्यूटी के लिए लिस्ट बनाई गई थी तब उसमें उनका नाम नहीं था। उन्होंने तत्काल प्रशासन से बात की और कोविड-19 में काम करने की इच्छा जताकर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाया। किशोर का कहना है कि कोरोना महामारी के दंश के आगे पथरी का दर्द कुछ भी नहीं है।
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बच्चों को मायके छोड़ मां कर रही ड्यूटी
किशोर ने बताया कि उनकी पत्नी प्रियंका दोनों बच्चों हितांशी और रेयांश को मायके में छोड़कर क्वारंटाइन टीम के साथ लगभग डेढ़ महीने से लगातार ड्यूटी कर रही हैं। माता-पिता से दूर होने के कारण दोनों बच्चे दुखी तो हैं, लेकिन वह अपने नानी के साथ मिलकर हम सब का मनोबल बढ़ाते हैं। जब भी मैं उन्हें फोन करता हूं वह मुझसे बस यही कहते हैं पापा कोरोना को जल्दी से खत्म करके नानी के घर आओ और हमें वापस चंडीगढ़ लेकर जाओ।