10 साल बाद 'जिंदा' लौटा पति, पत्नी विधवा पेंशन लेती रही
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सबके लिए अमरचंद मर चुका था। पत्नी विधवा पेंशन से गुजारा कर रही थी। 10 साल ऐसे ही चला। 10 साल बाद अचानक अमरचंद जिंदा वापस लौट आया तो पत्नी ने उसे अपनाने से इंकार कर दिया। मामला, पुलिस थाने पहुंचा।
पुलिस से लिखित समझौता करवाकर पीड़ित अमरचंद को पत्नी के साथ घर वापस भेज दिया है। ये मामला सामने आया, हरियाणा के कस्बे नांगल चौधरी में। ग्रामीणों ने बताया कि अमरचंद का मानसिक संतुलन खराब हो गया था।
इसी के चलते परिजनों ने उसे जयपुर स्थित एक अस्पताल में भर्ती करवाया था, किंतु उपचार का कोई लाभ नहीं होने के कारण अमरचंद 10 फरवरी 2005 को अचानक घर से लापता हो गया था। परिजनों ने विभिन्न रिश्तेदारियों में तलाश की, सुराग नहीं मिलने पर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई गई थी।
पति को सामने देख साथ रहने से कर दिया इंकार
इधर पत्नी ने मृत घोषित करवाकर विधवाओं को मिलने वाली सहायता हासिल कर ली थी, लेकिन 10 साल बीतने के बाद पिछले महीने अचानक से कानपुर जिले के पुरैनी गांव से लिखा हुआ पत्र मिला। पत्र में अमरचंद ने जीवित होने की पुष्टि की तथा घर आने की इच्छा जताई। सरपंच ओमप्रकाश को साथ लेकर परिजन पुरैनी पहुंच गए।
ग्रामीणों को देखकर अमरचंद खुशी से झूम उठा व बीबी, बच्चे, बूढ़ी माता की कुशलक्षेम पूछने लगा। इसके बाद परिजन पीड़ित को लेकर सोमवार की सुबह करीब 7 बजे नांगल पीपा पहुंचे। पति को सामने देखकर पत्नी संतोष क्रोधित हो गई और साथ सहने से साफ इंकार कर दिया।
सरपंच व अन्य परिजनों ने विचार-विमर्श करके पीड़ित को थाने में लेकर आए। उनके पीछे पत्नी संतोष, ससुर व साढू भी थाने में आ गए। पत्नी ने ग्रामीणों पर तंग करने के आरोप लगाए। इस पर एएसआई राजेंद्र कुमार ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर लिखित में समझौता करवाया। इसके बाद अमरचंद को उसकी पत्नी के साथ घर भेज दिया गया।
खुशहाल माहौल मिलने पर स्वस्थ हुआ दिमाग
दिमागी टेंशन से पीड़ित अमरचंद ने कानपुर जिले के पुरैनी गांव में पुलिस इंस्पेक्टर बृजमोहन के घर आसरा लिया था। उन्होंने अमरचंद को निजी फार्म हाउस में ठहरा दिया।
उचित उपचार व खुशहाल माहौल मिलने पर लगभग 3 साल बाद उसकी मानसिक स्थिति ठीक हो गई। अमरचंद ने फार्म हाउस के अनेक काम संभालने शुरू कर दिए।
एकाएक पीड़ित को घर की याद सताने लगी, उन्होंने बृजमोहन को घर का पूरा पता व बीबी-बच्चों के संदर्भ में बताया। इसके बाद परिजनों को पत्र भेजकर अमरचंद के जीवित होने की सूचना दी गई।
पुत्र की चेतावनी, नहीं घुसने दूंगा घर में
जहां एक तरफ पुत्र के जीवित होने की सूचना मिलने पर 80 वर्षीय माता ग्यारसी देवी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने परिजनों को जल्द अमरचंद से मिलाने की गुहार लगाई। वहीं दूसरी उसके ही पुत्र ने अमरचंद को घर में नहीं घुसने की चेतावनी दी।
सूचना मिलने के बाद अमरचंद की पत्नी ने तुरंत बड़े पुत्र को सूचना से अवगत कराया। पुत्र ने सरपंच ओमप्रकाश को फोन करके अमरचंद को वहीं छोड़ने को कहा। अन्यथा घर में नहीं घुसने की चेतावनी दी गई। चेतावनी से भयभीत पंचायत ने पुलिस की मदद लेना उचित समझा।
बूढ़ी माता की करुंगा देखभाल
पीड़ित अमरचंद ने बताया कि मुझे नहीं पता कि उत्तर प्रदेश कैसे पहुंच गया। याददाश्त लौटने के बाद पिछले 2-3 साल से परिजनों की याद सता रही है। अब बच्चों के साथ समय बिताऊंगा तथा बूढी माता की देखभाल करुंगा।
मुझे नहीं कोई आपत्ति
अमरचंद की पत्नी संतोष ने कहा कि पति के घर लौटने पर मुझे कोई आपत्ति नहीं है। ग्रामीणों ने जानबूझकर टकराव बढ़ाया है। इनकी घर वापसी में सलाह लेनी चाहिए थी, लेकिन मुझे अपमानित करने के मकसद से उन्होंने ऐसा नहीं किया। अब गिले-शिकवे दूर हो गए हैं, दोनों साथ-साथ रहेंगे।
पहले तो महिला ने पति को अपनाने से इंकार कर दिया था लेकिन बाद में जब ग्रामीणों ने समझाया तो बाद में वह साथ रहने को राजी हो गई।
ओमप्रकाश, सरपंच नांगल पीपा