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हाईकोर्ट के आदेश का पालन न करना पति को पड़ा भारी, 2 माह की जेल और दो हजार जुर्माना
Thu, 17 Sep 2020 10:39 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 17 Sep 2020 10:39 AM IST
सार
- बार-बार आदेश जारी करने के बावजूद नहीं किया गया भुगतान
- जेल अवधि के दौरान जमा किया पैसा तो सजा होगी निलंबित
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सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश का पालन न करना एक पति को इतना भारी पड़ गया कि अब उसे जेल की हवा खानी पड़ेगी। मामला पत्नी और बच्चे को गुजारा भत्ता देने संबंधी है। पंजाब के मोगा निवासी कुलवंत सिंह को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को न मानना भारी पड़ गया। उच्च न्यायालय ने उसे 2 महीने की जेल के साथ ही 2000 रुपये जुर्माना भरने के आदेश दिए हैं।
पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने मोगा निवासी कुलवंत को आदेश दिया था कि वह अपनी पत्नी को 5500 रुपये गुजारा भत्ता दे। इस आदेश के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कुलवंत ने याचिका दाखिल की थी। उच्च न्यायालय ने गुजारा भत्ता राशि को पत्नी के लिए 20 हजार तथा बच्चे के लिए 10 हजार रुपये तय किया था।
इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी और सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय को पुनर्विचार के आदेश दिए थे। उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए पत्नी को 25 हजार तथा बच्चे को 20 हजार रुपये गुजारा भत्ता भुगतान करने के आदेश दिए थे। कुलवंत सिंह ने उच्च न्यायालय में कहा था कि वह डेढ़ लाख रुपये जमा करवा देगा, लेकिनऐसा नहीं किया गया।
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इसके बाद उच्च न्यायालय ने उसे कई बार मौका दिया, लेकिन फिर भी उसने पैसे जमा नहीं कराए। उच्च न्यायालय ने उसके खिलाफ जमानती वारंट भी जारी किए, बावजूद इसके उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इसके चलते उच्च न्यायालय ने कुलवंत सिंह को अवमानना का दोषी मानते हुए 2 महीने की कैद और 2000 रुपये जुर्माना राशि अदा करने के आदेश दिए हैं।
हालांकि न्यायालय ने कहा कि यदि कैद अवधि के दौरान वह राशि का भुगतान कर देता है तो उसकी सजा को निलंबित माना जाएगा।
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पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने मोगा निवासी कुलवंत को आदेश दिया था कि वह अपनी पत्नी को 5500 रुपये गुजारा भत्ता दे। इस आदेश के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कुलवंत ने याचिका दाखिल की थी। उच्च न्यायालय ने गुजारा भत्ता राशि को पत्नी के लिए 20 हजार तथा बच्चे के लिए 10 हजार रुपये तय किया था।
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इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी और सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय को पुनर्विचार के आदेश दिए थे। उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए पत्नी को 25 हजार तथा बच्चे को 20 हजार रुपये गुजारा भत्ता भुगतान करने के आदेश दिए थे। कुलवंत सिंह ने उच्च न्यायालय में कहा था कि वह डेढ़ लाख रुपये जमा करवा देगा, लेकिनऐसा नहीं किया गया।
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इसके बाद उच्च न्यायालय ने उसे कई बार मौका दिया, लेकिन फिर भी उसने पैसे जमा नहीं कराए। उच्च न्यायालय ने उसके खिलाफ जमानती वारंट भी जारी किए, बावजूद इसके उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इसके चलते उच्च न्यायालय ने कुलवंत सिंह को अवमानना का दोषी मानते हुए 2 महीने की कैद और 2000 रुपये जुर्माना राशि अदा करने के आदेश दिए हैं।
हालांकि न्यायालय ने कहा कि यदि कैद अवधि के दौरान वह राशि का भुगतान कर देता है तो उसकी सजा को निलंबित माना जाएगा।