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जगदीश झींडा ने SGPC के इजलास को चुनौती दी, हाइकोर्ट में याचिका दायर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 04 Nov 2016 08:13 PM IST
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जगदीश झींडा
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एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश झींडा ने एसजीपीसी के इजलास को चुनौती देते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने याचिका दायर करके केंद्र सरकार के 26 अक्तूबर के उस नोटिफिकेशन पर रोक लगाने की मांग की जिसके तहत 5 नवंबर को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की पहली आम बैठक बुलाई गई है।
इस बैठक के दौरान ही सदस्यों को शपथ भी दिलाई जानी है। झींडा की याचिका पर शुक्त्रस्वार को सुनवाई करते हुए जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेन्द्र जैन की खंडपीठ ने कोई निर्देश जारी किए बिना सुनवाई सोमवार तक स्थगित कर दी। इस तरह शनिवार 5 नवंबर को होने वाली एसजीपीसी की आम बैठक का रास्ता भी साफ हो गया।
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इस बैठक के दौरान ही सदस्यों को शपथ भी दिलाई जानी है। झींडा की याचिका पर शुक्त्रस्वार को सुनवाई करते हुए जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेन्द्र जैन की खंडपीठ ने कोई निर्देश जारी किए बिना सुनवाई सोमवार तक स्थगित कर दी। इस तरह शनिवार 5 नवंबर को होने वाली एसजीपीसी की आम बैठक का रास्ता भी साफ हो गया।
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याचिका में झींडा ने ये दलील दी
जगदीश झींडा
जगदीश झींडा ने याचिका में कहा कि केंद्र सरकार ने 8 अक्तूबर, 2013 को एक नोटिफिकेशन जारी कर सहजधारी सिखों के एसजीपीसी चुनाव में मताधिकार को समाप्त कर दिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं भी दायर की गई थीं, जिन पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की फुल बेंच ने केंद्र सरकार की उस नोटिफिकेशन को रद कर दिया था।
फुल बेंच के इस फैसले के खिलाफ एसजीपीसी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में आगे कहा गया है कि वर्ष 2014 में हरियाणा विधानसभा ने हरियाणा में अलग सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी का गठन कर हरियाणा सिख गुरुद्वारा (मैनेजमेंट) एक्ट-2014 पारित कर दिया, जिससे अब सिख गुरुद्वारा एक्ट हरियाणा में प्रभावी नहीं रह गया है।
लेकिन इसी साल केंद्र सरकार ने एक्ट में संशोधन कर सहजधारियों को दोबारा मताधिकार से वंचित कर दिया है और सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका को इंफ्रकचुअस करार देते हुए खारिज कर दिया है।
फुल बेंच के इस फैसले के खिलाफ एसजीपीसी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में आगे कहा गया है कि वर्ष 2014 में हरियाणा विधानसभा ने हरियाणा में अलग सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी का गठन कर हरियाणा सिख गुरुद्वारा (मैनेजमेंट) एक्ट-2014 पारित कर दिया, जिससे अब सिख गुरुद्वारा एक्ट हरियाणा में प्रभावी नहीं रह गया है।
लेकिन इसी साल केंद्र सरकार ने एक्ट में संशोधन कर सहजधारियों को दोबारा मताधिकार से वंचित कर दिया है और सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका को इंफ्रकचुअस करार देते हुए खारिज कर दिया है।