पंजाब विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार किया एचएस फूलका का इस्तीफा, दी थी सुप्रीम कोर्ट जाने की धमकी
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पंजाब विधानसभा के स्पीकर राणा केपी सिंह ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के दाखा हलके से विधायक एचएस फूलका का विधानसभा सदस्यता से दिया गया इस्तीफा मंजूर कर लिया।
फूलका 2017 के विधानसभा चुनाव में लुधियाना जिले के दाखा हलके से आम आदमी पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। उन्होंने पिछले साल अक्तूबर में विधायक पद से इस्तीफा विधानसभा स्पीकर को सौंपा था।
स्पीकर राणा केपी सिंह ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि फूलका का इस्तीफा मंजूर करके दाखा विधानसभा सीट को खाली मान लिया गया है और इसकी सूचना भारत के चुनाव आयोग को भेजी जा रही है।
फूलका के इस्तीफा स्वीकार किए जाने में हुई देरी के बारे में स्पीकर ने कहा कि फूलका अपने इस्तीफे में बार-बार निजी बातें लिख देते थे, जबकि नियम 51 के अनुसार इस्तीफे के लिए केवल दो पंक्तियां भी होनी चाहिए।
जब फूलका का इस्तीफा नियम के अनुसार पहुंचा तो उस पर विचार किया गया और उसे मंजूर कर लिया गया। एक अन्य सवाल के जवाब में स्पीकर ने कहा कि बाकी जिन विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं, उन पर भी जल्द फैसला लिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले, हाल के लोकसभा चुनाव में अकाली दल के जलालाबाद से विधायक सुखबीर सिंह बादल और भाजपा के फगवाड़ा से विधायक सोमप्रकाश के चुनाव जीतने के बाद इन सीटों को भी खाली घोषित किया जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट एचएस फूलका ने पिछले साल अक्तूबर में इस्तीफा दिया था। लेकिन उस समय उन्होंने निर्धारित तरीके से इस्तीफा देने के बजाय एक पत्र के रूप में इस्तीफा विधानसभा स्पीकर को भेजा था, जिसके चलते उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं करते हुए स्पीकर ने उन्हें निर्धारित प्रारूप में इस्तीफा भेजने को कहा था।
तब फूलका ने विधानसभा के नियमों के अनुसार इस्तीफा स्पीकर सौंपा जो अब तक स्पीकर के पास विचाराधीन रहा। इस दौरान स्पीकर ने एक बार फूलका को बुलाकर उनके इस्तीफे का सत्यापन भी किया और इसके कुछ महीने बाद फूलका स्वयं जाकर स्पीकर से मिले और अपना इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह किया।
बीते सप्ताह बुलाए गए विधानसभा के मानसून सत्र से पहले दाखा हलके में विरोध प्रदर्शन भी हुआ, जिसके बाद फूलका ने स्पीकर को चेतावनी दी कि अगर उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया तो वह इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाएंगे।
बेअदबी के मुद्दे पर विधायकी न्योछावर : फूलका
एडवोकेट एचएस फूलका ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी मुद्दे पर वह विधायक जैसे कई पदों को न्योछावर करने में संकोच नहीं करेंगे।
विधानसभा स्पीकर राणा केपी सिंह द्वारा इस्तीफा स्वीकार करने के बाद जारी एक बयान में एडवोकेट एचएस फूलका ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अगस्त 2018 में न्यायमूर्ति रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया था।
विधानसभा में आयोग की रिपोर्ट में बहुत सारे साक्ष्य विशेषकर तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के शामिल होने के बारे में सामने आए थे। विधानसभा ने पूरे दिन बहस हुई। इस विशेष सत्र को सभी टीवी चैनलों पर लाइव भी दिखाया गया था। सरकार और उसके मंत्रियों ने बादल के खिलाफ कार्रवाई का इतना दावा किया लेकिन अंत में बादल के खिलाफ कार्रवाई करने का कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया।
उसी दिन उन्होंने कहा था कि सरकार ने आज जो अवसर खो दिया था, वह फिर नहीं आएगा। सरकार ने आयोग की रिपोर्ट पर हुई बहस के बाद कोई भी प्रस्ताव पारित नहीं किया है। उन्होंने उसी दिन स्पष्ट कर दिया था कि सरकार बादल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी। उस समय विपक्षी नेता मुझसे सहमत नहीं थे। बल्कि उनके स्टैंड की आलोचना की गई थी।
उसी समय, मैंने घोषणा की थी कि विरोध में मैं विधानसभा से इस्तीफा दे दूंगा। उन्होंने 12 अक्तूबर 2018 को अपना इस्तीफा स्पीकर को सौंप दिया था। जिस मुद्दे पर उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था, वह मुद्दे आज और भी प्रखर हो गए है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह अब तक बेअदबी के दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सके हैं। अब उनका इस्तीफा फिर से बादल के खिलाफ कार्रवाई के मुद्दे का केंद्रीय बिंदु बनेगा। जनता की राय जुटाएगा, लोगों को न्यायमूर्ति रणजीत सिंह आयोग के निष्कर्षों और बादलों के खिलाफ सबूतों की याद दिलाएगा।