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जो छात्र जाना चाहते हैं, उन्हें घर तक पहुंचाएगा पीयू
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चंडीगढ़। शुक्रवार को हुए हंगामे के बाद शनिवार को पंजाब विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू प्रो. एसके तोमर की अध्यक्षता में सभी वार्डन व छात्रों की बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया कि जो छात्र अपने घर जाना चाहते हैं, उन्हें पीयू अपनी बसों से घर सुरक्षित पहुंचाएगा। पीयू किसी भी छात्र को जबरदस्ती नहीं भेजेगा। न भेज रहा है। छात्रों को घर भेजने से पहले विवि छात्र का घर किस जगह और वहां के हालात क्या हैं, इस बारे में पता करेगा। यदि वहां स्थिति सामान्य हुई तभी छात्र को घर भेजा जाएगा। वहीं, अधिकांश छात्रों ने कहा कि वह घर नहीं जाना चाहते। वह पीयू में ही रहेंगे। यदि पीयू ने निकालने की कोशिश की तो प्रोटेस्ट करेंगे।
शनिवार सुबह डीएसडब्ल्यू ने सभी वार्डन को बैठक में बुलाया। साथ ही हर हॉस्टल से एक-दो छात्रों को भी बुलाया गया। साथ ही छात्र नेताओं को भी शामिल किया गया। सभी वार्डन ने इस दौरान बताया कि छात्र एक-दूसरे हॉस्टल में जा रहे हैं। इससे कोरोना का खतरा बढ़ रहा है। मेस आदि का भी संचालन प्रभावित होता है। एक साथ समूहों में छात्र देखे जा रहे हैं। इस पर छात्रों ने कहा कि वह नियमों का ध्यान रख रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में यदि कोरोना पीक पर पहुंचा तो निकलना संभव नहीं हो पाएगा इसलिए छात्र चाहें तो अपने घर जा सकते हैं।
कोरोना से छात्रों के इलाभके सुरक्षित तभी भेजेगा पीयू
बैठक में यह बात कही गई कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश पास के राज्य हैं। यहां के स्टूडेंट्स आसानी से घर जा सकते हैं। उन्हें पहुंचाने के लिए पीयू बंदोबस्त भी करेगा। वहीं, दूर के राज्यों के विद्यार्थी अगर जाने को कहेंगे तो वह भी जा सकते हैं लेकिन उससे पहले पीयू यह जानकारी जुटाएगा कि उनके इलाके में कोरोना की क्या स्थिति है। स्थिति सामान्य हुई तभी छात्रों को भेजा जाएगा। जबरन किसी छात्र को नहीं भेजा जाएगा। पीयू चाहता है कि छात्र घरों पर जाएंगे तो वह अधिक सुरक्षित रह पाएंगे। परिवार भी उनका ख्याल रखेगा।
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छात्रों को उनकी मर्जी के बगैर भेजा तो करेंगे प्रोटेस्ट : छात्र नेता
एबीवीपी के छात्र नेता जतिन सिंह ने कहा कि छात्र पास के राज्यों के हैं और वह जाना चाहते हैं तो पीयू उन्हें भिजवाने की व्यवस्था करे लेकिन जबरदस्ती किसी के साथ न की जाए। यही बात राहुल कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि छात्रों से पूछा जाए। खुशी से वह जाना चाहते हैं तभी उन्हें भेजा जाए। एनएसयूआई के छात्र नेता निखिल नरमेटा ने भी कहा कि छात्रों के साथ जबरदस्ती पीयू प्रशासन ने की तो फिर प्रोटेस्ट करेंगे। छात्र अपने परिवार की मर्जी से यहां रुके हैं। छात्र चाहते हैं कि उनके कारण उनका परिवार कहीं कोरोना की चपेट में न आ जाएं।
एक छात्र नेता को बैठक में बुलाने का विरोध
बैठक में छात्रों को न बुलाने का आरोप छात्र नेता मुकुल ने लगाया है। कहा कि छात्रों की बात सुनने से पहले एक बाहरी छात्र नेेता को बैठक में बुला लिया गया जो गलत है। हम इसकी निंदा करते हैं। हालांकि बाद में छात्रों को भी बुलाया गया। मुकुल ने कहा कि छात्रों को उनकी मर्जी के अनुसार ही घर भेजा जाए न कि जबरदस्ती। उधर, हॉस्टलों के छात्र भी डीएसडब्ल्यू कार्यालय के बाहर पहुंचे थे। यदि उनके खिलाफ निर्णय आता तो वह प्रदर्शन करते।
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शनिवार सुबह डीएसडब्ल्यू ने सभी वार्डन को बैठक में बुलाया। साथ ही हर हॉस्टल से एक-दो छात्रों को भी बुलाया गया। साथ ही छात्र नेताओं को भी शामिल किया गया। सभी वार्डन ने इस दौरान बताया कि छात्र एक-दूसरे हॉस्टल में जा रहे हैं। इससे कोरोना का खतरा बढ़ रहा है। मेस आदि का भी संचालन प्रभावित होता है। एक साथ समूहों में छात्र देखे जा रहे हैं। इस पर छात्रों ने कहा कि वह नियमों का ध्यान रख रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में यदि कोरोना पीक पर पहुंचा तो निकलना संभव नहीं हो पाएगा इसलिए छात्र चाहें तो अपने घर जा सकते हैं।
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कोरोना से छात्रों के इलाभके सुरक्षित तभी भेजेगा पीयू
बैठक में यह बात कही गई कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश पास के राज्य हैं। यहां के स्टूडेंट्स आसानी से घर जा सकते हैं। उन्हें पहुंचाने के लिए पीयू बंदोबस्त भी करेगा। वहीं, दूर के राज्यों के विद्यार्थी अगर जाने को कहेंगे तो वह भी जा सकते हैं लेकिन उससे पहले पीयू यह जानकारी जुटाएगा कि उनके इलाके में कोरोना की क्या स्थिति है। स्थिति सामान्य हुई तभी छात्रों को भेजा जाएगा। जबरन किसी छात्र को नहीं भेजा जाएगा। पीयू चाहता है कि छात्र घरों पर जाएंगे तो वह अधिक सुरक्षित रह पाएंगे। परिवार भी उनका ख्याल रखेगा।
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छात्रों को उनकी मर्जी के बगैर भेजा तो करेंगे प्रोटेस्ट : छात्र नेता
एबीवीपी के छात्र नेता जतिन सिंह ने कहा कि छात्र पास के राज्यों के हैं और वह जाना चाहते हैं तो पीयू उन्हें भिजवाने की व्यवस्था करे लेकिन जबरदस्ती किसी के साथ न की जाए। यही बात राहुल कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि छात्रों से पूछा जाए। खुशी से वह जाना चाहते हैं तभी उन्हें भेजा जाए। एनएसयूआई के छात्र नेता निखिल नरमेटा ने भी कहा कि छात्रों के साथ जबरदस्ती पीयू प्रशासन ने की तो फिर प्रोटेस्ट करेंगे। छात्र अपने परिवार की मर्जी से यहां रुके हैं। छात्र चाहते हैं कि उनके कारण उनका परिवार कहीं कोरोना की चपेट में न आ जाएं।
एक छात्र नेता को बैठक में बुलाने का विरोध
बैठक में छात्रों को न बुलाने का आरोप छात्र नेता मुकुल ने लगाया है। कहा कि छात्रों की बात सुनने से पहले एक बाहरी छात्र नेेता को बैठक में बुला लिया गया जो गलत है। हम इसकी निंदा करते हैं। हालांकि बाद में छात्रों को भी बुलाया गया। मुकुल ने कहा कि छात्रों को उनकी मर्जी के अनुसार ही घर भेजा जाए न कि जबरदस्ती। उधर, हॉस्टलों के छात्र भी डीएसडब्ल्यू कार्यालय के बाहर पहुंचे थे। यदि उनके खिलाफ निर्णय आता तो वह प्रदर्शन करते।