मंच पर हुड्डा-तंवर में दिखाई दी तल्खी
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टिकट वितरण को लेकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर के बीच हुई तनातनी अभी सामान्य नहीं हुई है। घोषणा पत्र जारी होने के दौरान यह नजारा मंच पर भी देखने को मिला।
इस दौरान अशोक तंवर ने मंच पर मुख्यमंत्री से कम ही मुखातिब हुए। यहां तक की लंच के समय वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में मुख्यमंत्री के साथ बैठे तब भी कम ही बातचीत हुई।
बाद में पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मेरी जो भी बातें थी उससे पार्टी हाईकमान को अवगत करवा दिया गया है। अब मेरा ध्यान पूरी तरह से प्रदेश के नब्बे विधानसभा क्षेत्र में उतरे उम्मीदवारों की जीत पर है।
घोषणा पत्र के बारे में उन्होंने कहा कि कांग्रेस दावों की जगह काम में विश्वास रखती है। इसलिए घोषणापत्र में वही बातें कही गई हैं, जिन्हें कांग्रेस पूरा करेगी। पिछले घोषणा पत्र के सभी सभी वादे पूरे किए हैं।
सूची को लेकर हुड्डा-तंवर में तकरार
हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में चली लंबी तकरार के बाद अंतत: बुधवार देर शाम पार्टी प्रत्याशियों की सूची जारी हो गई।
सूची को लेकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश अध्यक्ष डा. अशोक तंवर के बीच तीन दौर की तकरार हुई, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद मामला निपटा दिया गया।
सूची में दागी विधायकों का नाम काटने को लेकर अड़े प्रदेश अध्यक्ष डा. अशोक तंवर को अंतत: पार्टी निर्णय पर भरोसा जताना पड़ा। दोनों पक्षों में यह तकरार करीब 30 सीटों को लेकर थी।
इसमें से डेढ़ दर्जन ऐसे विधायकों पर मामला अटक रहा था जो दागी थे या किसी न किसी विवाद का सामना कर रहे थे। इसके अलावा नेता पुत्रों को टिकट दिए जाने को लेकर भी दोनों पक्षों में अलग-अलग राय थी।
सोनिया गांधी तक भी पहुंचा मामला
सोमवार को दिल्ली में हुई बैठक में दोनो पक्षों में इस बात को लेकर तनातनी हुई, जिसके बाद बुधवार को यह तनातनी बढ़ गई। तंवर ने अपने इस्तीफे की पेशकश तक कर डाली। इसके बाद मामला सोनिया गांधी तक भी पहुंचा और उन्होंने तंवर को आश्वासन दिया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह पार्टी के अंदर की बातें हैं।
चुनाव प्रचार में दोनों नेता एक बार फिर एक साथ कांग्रेस के मंच पर नजर आएंगे। इसके बाद तंवर ने इन विधायकों को टिकट नहीं देने की बात राहुल गांधी से की थी। माना जाता है कि राहुल गांधी ने तंवर की शिकायत को हुड्डा तक पहुंचाया था। उधर फरीदाबाद और बड़खल से पूर्व मंत्री एसी चौधरी को टिकट नहीं मिला है।
चौधरी पिछली बार फरीदाबाद एनआईटी से चुनाव लड़े थे और हार गए थे। जिसके बाद उन्होंने बड़खल या फरीदाबाद से टिकट की मांग की थी, लेकिन उन्हें सूची में जगह नहीं मिली।