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HMT को बचाने को मोदी को पत्र, पूंजी दीजिए, प्रमुख ईकाई बनेगी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 08 Apr 2016 08:52 PM IST
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आंखों से देखने में असमर्थ ने भी लिया पदयात्रा में हिस्सा
- फोटो : amarujala
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एक जमाने में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और चंडीगढ़ के छोटे उद्योगों के लिए लाइफलाइन की भूमिका निभाने वाली एचएमटी पिंजौर के साथ यदि क्षेत्रीय स्तर पर भेदभाव न होता तो यह फैक्टरी आज भी उत्तर भारत में प्रमुख ट्रैक्टर निर्माता कंपनी होती। इस फैक्टरी के साथ बंगलूरू स्थित एचएमटी मुख्यालय ही लंबे समय से क्षेत्रीय स्तर पर भेदभाव करता रहा है। दक्षिण भारत में स्थित एचएमटी की विभिन्न इकाइयों को साल दर साल वर्किंग कैपिटल और अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाती रहीं, जबकि पिंजौर एचएमटी की वर्किंग कैपिटल में कटौती करने से इसके उत्पादन पर बुरा असर पड़ा।
यही नहीं, दक्षिण भारत की जो एचएमटी इकाइयां घाटे में चल रही थीं, उनके कर्मचारियों को पिंजौर शिफ्ट किया जाता रहा। नतीजतन एचएमटी पिंजौर धीरे-धीरे घाटे की इकाई बन गई। इस पूरे मामले का जिक्र करते हुए बीते सप्ताह शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष व एचएमटी बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक विजय बंसल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि अगर अन्य एचएमटी इकाइयों की तरह ही पिंजौर इकाई को पूंजी उपलब्ध कराई जाए तो यह इकाई फिर से प्रमुख इकाई बन सकती है।
एचएमटी पिंजौर की मौजूदा स्थिति यह है कि ट्रैक्टर प्लांट के कर्मचारियों को 20 महीने से और मशीन टूल्स के कर्मचारियों को 11 महीने से वेतन नहीं मिला है। इन दोनों प्लांटों में उत्पादन के लिए भी इकाई को कोई पैसा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। वहीं, दक्षिण भारत में एचएमटी की सभी इकाइयों में कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन मिल रहा है। विजय बंसल ने पीएम को लिखे पत्र में इस बात का भी जिक्र किया है कि एचएमटी पिंजौर की खस्ता हालत के लिए हैदराबाद के श्रीनगर और रानी बाग से कर्मचारियों को पिंजौर शिफ्ट करके बोझ डाला गया।
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बीते वर्ष एचएमटी मुख्यालय ने 6 मशीन टूल्स यूनिटों को वर्किंग कैपिटल के रूप में 60 करोड़ रुपये दिए, लेकिन एचएमटी पिंजौर को केवल 7 करोड़ रुपये ही वर्किंग कैपिटल के रूप में दिए गए। फिर भी पिंजौर मशीन टूल की इस वर्ष की टर्न ओवर 8.9 करोड़ से 20.6 करोड़ हो गई। पिंजौर इकाई की वर्किंग कैपिटल को 15 करोड़ से घटाकर केवल 7 करोड़ कर दिया गया, फिर भी टर्न ओवर 232 प्रतिशत तक बढ़ी। दूसरी ओर, दक्षिण भारत स्थित एचएमटी यूनिटों में कालमेसरी को 13 करोड़ दिए गए जबकि इस यूनिट की ग्रोथ 16 प्रतिशत रही। मशीन टूल हैदराबाद को 16 करोड़ वर्किंग कैपिटल दी गई, लेकिन ग्रोथ केवल 38 प्रतिशत रही।
इसी तरह, बंगलूरू में मशीन टूल को 14 करोड़ वर्किंग कैपिटल दी गई, लेकिन ग्रोथ केवल 31 प्रतिशत दर्ज हुई। विजय बंसल ने पत्र में दावा किया है कि एचएमटी के अन्य सभी यूनिटों की ग्रोथ प्रतिशत को जोड़कर भी एचएमटी पिंजौर की प्रतिशत ग्रोथ कहीं अधिक है। हैरानी की बात यह भी है कि जब एचएमटी पिंजौर की टर्नओवर 8.9 करोड़ थी तब सभी कर्मचारियों को नियमित वेतन दिया जा रहा था लेकिन जब टर्नओवर 20.6 करोड़ हो गई तो 11 माह से वेतन नहीं दिया जा रहा।
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यही नहीं, दक्षिण भारत की जो एचएमटी इकाइयां घाटे में चल रही थीं, उनके कर्मचारियों को पिंजौर शिफ्ट किया जाता रहा। नतीजतन एचएमटी पिंजौर धीरे-धीरे घाटे की इकाई बन गई। इस पूरे मामले का जिक्र करते हुए बीते सप्ताह शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष व एचएमटी बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक विजय बंसल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि अगर अन्य एचएमटी इकाइयों की तरह ही पिंजौर इकाई को पूंजी उपलब्ध कराई जाए तो यह इकाई फिर से प्रमुख इकाई बन सकती है।
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एचएमटी पिंजौर की मौजूदा स्थिति यह है कि ट्रैक्टर प्लांट के कर्मचारियों को 20 महीने से और मशीन टूल्स के कर्मचारियों को 11 महीने से वेतन नहीं मिला है। इन दोनों प्लांटों में उत्पादन के लिए भी इकाई को कोई पैसा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। वहीं, दक्षिण भारत में एचएमटी की सभी इकाइयों में कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन मिल रहा है। विजय बंसल ने पीएम को लिखे पत्र में इस बात का भी जिक्र किया है कि एचएमटी पिंजौर की खस्ता हालत के लिए हैदराबाद के श्रीनगर और रानी बाग से कर्मचारियों को पिंजौर शिफ्ट करके बोझ डाला गया।
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बीते वर्ष एचएमटी मुख्यालय ने 6 मशीन टूल्स यूनिटों को वर्किंग कैपिटल के रूप में 60 करोड़ रुपये दिए, लेकिन एचएमटी पिंजौर को केवल 7 करोड़ रुपये ही वर्किंग कैपिटल के रूप में दिए गए। फिर भी पिंजौर मशीन टूल की इस वर्ष की टर्न ओवर 8.9 करोड़ से 20.6 करोड़ हो गई। पिंजौर इकाई की वर्किंग कैपिटल को 15 करोड़ से घटाकर केवल 7 करोड़ कर दिया गया, फिर भी टर्न ओवर 232 प्रतिशत तक बढ़ी। दूसरी ओर, दक्षिण भारत स्थित एचएमटी यूनिटों में कालमेसरी को 13 करोड़ दिए गए जबकि इस यूनिट की ग्रोथ 16 प्रतिशत रही। मशीन टूल हैदराबाद को 16 करोड़ वर्किंग कैपिटल दी गई, लेकिन ग्रोथ केवल 38 प्रतिशत रही।
इसी तरह, बंगलूरू में मशीन टूल को 14 करोड़ वर्किंग कैपिटल दी गई, लेकिन ग्रोथ केवल 31 प्रतिशत दर्ज हुई। विजय बंसल ने पत्र में दावा किया है कि एचएमटी के अन्य सभी यूनिटों की ग्रोथ प्रतिशत को जोड़कर भी एचएमटी पिंजौर की प्रतिशत ग्रोथ कहीं अधिक है। हैरानी की बात यह भी है कि जब एचएमटी पिंजौर की टर्नओवर 8.9 करोड़ थी तब सभी कर्मचारियों को नियमित वेतन दिया जा रहा था लेकिन जब टर्नओवर 20.6 करोड़ हो गई तो 11 माह से वेतन नहीं दिया जा रहा।