हिरासत हत्याकांड : आईजी जहूर एच जैदी की जमानत रद्द, भेजा जेल
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गुड़िया मर्डर केस के आरोपी की पुलिस हिरासत मौत मामले में सीबीआई कोर्ट ने वीरवार को आरोपी आईजी पुलिस जहूर एच जैदी की जमानत को रद्द कर उसे न्यायिक हिरासत में लेने का निर्देश दे दिया। 20 जनवरी को सीबीआई ने अदालत में आरोपी जहूर जैदी की जमानत को खारिज करने के लिए अर्जी दायर की थी। साथ ही सीबीआई ने जैदी की गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वारंट जारी करने के लिए भी प्रार्थना की थी।
शिमला की एसपी सौम्या संबशिवन ने सीबीआई को एक आवेदन दायर कर कहा था कि जैदी ने उन पर अदालत में बयान बदलने के लिए दबाव डाला था। सीबीआई जांच के बाद 38 दिन के अंदर 29 अगस्त 2017 को आरोपी जैदी को पहली बार गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वह 19 महीने तक वह हिरासत में रहा। उसे सुप्रीम कोर्ट से 6 अप्रैल 2019 को जमानत मिली थी।
सीबीआई की अर्जी के जवाब में शुक्रवार को आरोपी जैदी के वकील ने कहा कि जैदी के पास ऐसा कोई कारण नहीं था, जिससे वह गवाह को बयान बदलने के लिए दबाव डालता। सौम्या के बयान के बाद 15 जनवरी 2020 को जैदी को फिर सस्पेंड करने के बाद वह शक्तिहीन हो गया था, वह कैसे दबाव डालता। वकील ने कहा कि सीबीआई को दो फोन कॉल जो 20 मिनट और 13 मिनट तक की गई, उसके बारे में जांच करनी चाहिए थी कि सौम्या और आरोपी के बीच इतनी देर किस बारे में बात हुई।
6 जनवरी 2020 को एडिशनल एसपी को जैदी द्वारा किए फोन के बारे में वकील ने कहा कि सौम्या को यह पूछने के लिए फोन किया गया था कि वह 8 जनवरी को बयान देने आ रही हैं या नहीं। ताकि आरोपी अपने क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए तैयार रहे और अपने वकील की सहायता कर सके।
सीबीआई जज सुशील कुमार गर्ग ने कहा कि आरोपी जैदी ने बेल बांड और व्यक्तिगत बांड की शर्तों का उल्लंघन किया। उन्होंने अभियोजन पक्ष की गवाह सौम्या को डराने, और दबाव डालकर बयान बदलने की कोशिश की है। कहा कि जैदी उच्च रैंक के अधिकारी हैं, उनसे इस तरह की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। अगर वह उच्च अधिकारी सौम्या पर दबाव डाल सकते हैं तो दूसरे गवाहों पर भी दबाव डालने की पूरी संभावना है। यह कहते हुए अदालत ने जैदी की जमानत को रद्द कर दिया, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
यह है मामला
शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की स्टूडेंट 4 जुलाई 2017 को लापता हो गई थी। दो दिन बाद जंगल से उसकी लाश बरामद हुई थी। एसआईटी ने स्थानीय युवक समेत पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया। जिनमें सूरज नाम का एक नेपाली युवक भी था। लेकिन कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को सूरज की मौत हो गई।
सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस के टॉर्चर से ही सूरज की मौत हुई थी। इस केस में सीबीआई ने आईजीपी जहूर एच जैदी, एसपी डीडब्ल्यू नेगी, डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद, हेड कांस्टेबल्स सूरत सिंह, मोहन लाल, रफिक अली और कांस्टेबल रंजीत को आरोपी बनाया। इन आरोपियों के खिलाफ शिमला की सीबीआई कोर्ट में केस चल रहा था। लेकिन वहां इनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ जिस कारण सुप्रीम कोर्ट ने केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।