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हाईलेवल मेट्रो की मीटिंग में नहीं निकला कोई नतीजा, प्रोजेक्ट में लगातार हो रही देरी

Tue, 23 Aug 2016 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Updated Tue, 23 Aug 2016 11:04 PM IST
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Highlevel meeting for metro project in the city Not yielded any result
मेट्रो
यूटी सचिवालय में मंगलवार को आयोजित मेट्रो की मीटिंग में किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका। प्रॉपर्टी डेवलपमेंट प्लान ही मीटिंग का मुख्य मुद्दा रहा। मीटिंग में यूटी प्रशासन के अधिकारियों के साथ पंजाब और हरियाणा के अधिकारी भी शामिल हुए। दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन (डीएमआरसी) के डिप्टी जनरल मैनेजर श्रीकांत प्रसाद ने भी बैठक में हिस्सा लिया। 
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प्रॉपर्टी डेवलपमेंट प्लान संबंधी जरूरतों को यूटी प्रशासन ने पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों को जानकारी दे दी है। इसके बाद अधिकारियों ने कहा कि वह अपनी सरकार को इससे अवगत करवाएंगे। प्रॉपर्टी डेवलपमेंट प्लान के लिए डीएमआरसी के अधिकारी श्रीकांत प्रसाद ने 200 एकड़ जमीन उपलब्ध करवाने की बात कही। इसमें करीब 120 एकड़ चंडीगढ़ को और बाकी पंजाब व हरियाणा को देनी है। जमीन उपलब्ध नहीं करवा पाने की स्थिति में प्रतिवर्ष 1000 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाने होंगे। इसमें 750 करोड़ चंडीगढ़ प्रशासन को जुटाने होंगे। ये दोनों बिंदु मेट्रो का चक्का जाम करने वाली हैं। 
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बात चंडीगढ़ की करें तो प्रशासन न तो इतनी जमीन उपलब्ध करवाने की स्थिति में है और न ही रकम। जितनी रकम इसके लिए हर साल जुटानी होगी, उतना तो चंडीगढ़ का प्लान बजट होता है। अब प्रशासन को पंजाब और हरियाणा के जवाब का इंतजार रहेगा। जल्द ही यूटी प्रशासन मेट्रो प्रोजेक्ट पर अपनी अलग से बैठक करेगा। इस मीटिंग में चंडीगढ़ प्रशासन से एडवाइजर परिमल राय, वित्त सचिव सर्वजीत सिंह, एडीसी कम ज्वाइंट सेक्रेटरी ट्रांसपोर्ट अमित तलवार मौजूद रहे।
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प्रोजेक्ट में लगातार हो रही देरी
मेट्रो प्रोजेक्ट में लगातार देरी हो रही है। डीपीआर फाइनल होने के बाद वर्ष 2016 में इसका ग्राउंड लेवल पर काम शुरू होना था और 2021 में पूरा हो जाना था। लेकिन जुलाई बीतने के बाद अब तक डीपीआर ही फाइनल नहीं हो पाई है। इस कारण ग्राउंड लेवल पर काम भी नहीं शुरू हो पाया है। इस देरी के चक्कर में एस्टीमेट बजट भी 10 हजार 909 करोड़ से 13 हजार 900 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
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