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चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को हाईकोर्ट की फटकार

Tue, 14 Jan 2014 05:32 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 14 Jan 2014 05:32 PM IST
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Highcourt Scolds to Chandigarh Housing Board
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) की 2008 की सेल्फ फाइनेंसिंग स्कीम पर फिर चार हजार के करीब कर्मचारियों को राहत की उम्मीद बंधी है।
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बीस रिटायर्ड कर्मचारियों द्वारा दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन और सीएचबी को कड़ी फटकार लगाई है।

सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दोनों से पूछा कि इस समस्या के समाधान के लिए पांच साल तक क्या किया गया।

हाईकोर्ट ने मौखिक चेतावनी दी कि अगर जल्द प्रशासन की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया गया तो हाईकोर्ट को आपराधिक मामला चलाने की दिशा में कठोर कदम उठाना पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने इस स्कीम के तहत पैसों के हिसाब किताब की जानकारी देने के भी निर्देश जारी किए हैं।
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रिटायर्ड कर्मचारी फूल कुमार सैनी एवं अन्य ने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में यह मामला उठाया है। याचिका में कहा गया कि सीएचबी की 2008 की सेल्फ फाइनेंसिंग स्कीम के तहत 3900 कर्मचारियों को पीड़ित किया जा रहा है।
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अभी तक यह योजना लागू नहीं हो पाई है। याचिका में कहा गया कि साढ़े पांच साल की अवधि गुजरने के बावजूद अलॉटमेंट को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया। जनरल हाउसिंग स्कीम के तहत फ्लैट आवंटन का काम भी शुरू हो गया है।

याचिका में कहा गया कि बोर्ड से इस संबंध में सवाल करने पर उन्हें मानसिक, शारीरिक और वित्तीय रूप से परेशान किया जा रहा है। याचिका में सीएचबी की अफसरशाही की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया गया है।

याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया गया कि इस मामले में प्रशासन और सीएचबी को 2008 की सेल्फ फाइनेंसिंग स्कीम को 99 साल की लीज होल्ड पर लागू करने के निर्देश जारी किए जाएं।

सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान इस स्कीम के तहत आवेदन करने वाले दर्जनों मुलाजिम कोर्ट रूम में उपस्थित रहे। उधर, इस स्कीम के तहत जमीन के मामले में अभी तक चंडीगढ़ प्रशासन हाईकोर्ट को आश्वस्त नहीं कर पाया है।

फरवरी 2008 में लांच हुई थी आवासीय योजना
नवंबर, 2010 में निकाला गया था ड्रा
7812 कर्मचारियों ने किया था आवेदन
4530 कर्मचारी ड्रा में रहे थे सफल

यह है स्कीम
इस आवासीय योजना में  यूटी के कर्मचारियों के लिए सीएचबी की ओर से ए कैटेगरी के 252 फ्लैट बनाए जाने हैं। ए कैटेगरी के  फ्लैट दो हजार वर्ग फुट (तीन बेडरूम) में बनने हैं। छह साल पहले इसकी अनुमानित कीमत 34.7 लाख थी।

बी कैटेगरी के 168 फ्लैट 1400 वर्ग फुट (दो बेडरूम) में बनने हैं। इसकी अनुमानित कीमत 24.3 लाख थी। सी कैटेगरी के 3066 फ्लैट बनने हैं और यह फ्लैट 900 वर्ग फुट में बनने हैं। इसकी अनुमानित कीमत 13.53 लाख रुपये थी। डी कैटेगरी के 444 फ्लैटों की अनुमानित कीमत 5.76 लाख थी।

यह है स्थिति
इस आवासीय योजना के लिए चंडीगढ़ प्रशासन अभी तक सीएचबी को जमीन अलॉट नहीं कर सका है। दूसरी ओर सेक्टर-52, 53, 56 में इस आवासीय योजना के लिए फ्लैट बनाने के लिए जमीन की मार्किंग की थी और नियमों के अनुसार सीएचबी को इसके बाद 25 फीसदी हिस्सा जमा कराना था, लेकिन सीएचबी ने ऐसा नहीं किया।


अब मामला यह फंसा हुआ है कि सीएचबी को नए रेट के हिसाब से जमीन अलॉट की जाए या पुराने रेट के हिसाब से। इस पर सीएचबी में मंथन चल रहा है। अगर सीएचबी को नए रेट पर जमीन अलॉट होती है तो फ्लैट के रेट बढ़ जाएंगे।
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