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साढ़े तीन साल के बच्चे की कस्टडी पिता को: HC ने दिया ये कारण, विवाहेत्तर संबंधों के आरोपों को बताया सामान्य

Wed, 09 Apr 2025 10:45 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 09 Apr 2025 10:45 PM IST
सार

दंपती की शादी 2019 में हुई थी और 2021 में दोनों अलग हो गए थे। तब महिला ने बच्चे की कस्टडी पिता को देने पर सहमति जताई थी। 2024 में महिला ने बच्चे की कस्टडी वापस पाने की इच्छा जताई। जिसे खारिज कर दिया गया था।

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Highcourt Refused to grant interim custody of child to mother
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तीन साल छह महीने के बच्चे की अंतरिम कस्टडी मां को देने से इनकार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चा अपने पिता के साथ खुश है और उसे वहां से हटाना उसके सर्वोत्तम हित में नहीं होगा। 

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कोर्ट ने मां द्वारा पिता पर दूसरी महिला से संबंध होने की दलील पर कहा कि आरोप विचार के लायक नहीं हैं, ऐसे आरोप अक्सर वैवाहिक विवादों में लगाए जाते हैं।

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जींद फैमिली कोर्ट के फैसले को दी थी चुनाैती

जींद फैमिली कोर्ट द्वारा अंतरिम कस्टडी की मांग को खारिज करने के फैसले को मां ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दंपति की शादी 2019 में हुई थी, लेकिन आपसी मतभेदों के चलते तलाक के लिए याचिका दायर की गई। 2021 में दोनों पक्षों ने संयुक्त बयान देकर कहा कि सभी विवाद सुलझा लिए गए हैं और बच्चे की कस्टडी पिता को सौंपी जा रही है। साथ ही पत्नी ने भविष्य में कस्टडी या मुलाकात का कोई अधिकार न रखने की बात मानी थी। 

हालांकि, 2024 में पत्नी फैमिली कोर्ट में पेश हुई और उसने तलाक नहीं लेने और बच्चे की कस्टडी वापस पाने की इच्छा जताई। इसके बाद उसने गार्जियन एंड वॉर्ड्स एक्ट की धारा 7 और 25 के तहत याचिका दायर की, जो खारिज कर दी गई।

हाईकोर्ट ने की ये टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू अल्पसंख्यक और संरक्षकता अधिनियम, 1956 की धारा 6 के अनुसार, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे की कस्टडी सामान्यत मां को दी जानी चाहिए, लेकिन यह सामान्य स्थिति नहीं है। कोर्ट ने पाया कि पति डिजिटल मार्केटिंग का काम करते हैं और घर से कार्यरत रहते हैं, जिससे वे बच्चे की अच्छी देखभाल कर पा रहे हैं, जबकि पत्नी केवल 10,000 रुपये ट्यूशन से कमाती हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि जब बच्चे से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की गई और पिता को कुछ समय के लिए बाहर भेजा गया, तो बच्चा जोर-जोर से रोने लगा और पिता को छोड़ने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इतने छोटे बच्चे उस अभिभावक से चिपके रहते हैं जिसके साथ वे अधिक समय तक रहते हैं। यदि अब मां को कस्टडी दी जाती है और फिर बाद में पिता को दी जाए, तो बच्चा फिर से वैसा ही व्यवहार कर सकता है।

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