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बंद होने की कगार पर PU, हाईकोर्ट ने कहा- नहीं होने देंगे बंद
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 21 Oct 2016 09:35 AM IST
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Court On PU
- फोटो : File Photo
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वीरवार को कहा कि केंद्र सरकार से ग्रांट नहीं मिलने के चलते पंजाब यूनिवर्सिटी को बंद होने नहीं दिया जाएगा। हालांकि इस मामले में पीयू की ओर से उपस्थित वकील के आग्रह के बावजूद जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ ने केंद्र या पंजाब सरकार को किसी तरह के निर्देश जारी करने से इंकार कर दिया।
पीयू के सीनियर एडवोकेट गिरीष अग्निहोत्री ने अदालत से आग्रह किया कि केंद्र सरकार को फंड रिलीज करने के आदेश जारी किए जाएं, लेकिन खंडपीठ ने पीयू की वित्तीय स्थिति के बारे में पेश की गई रिपोर्ट की प्रति केंद्र के वकील को सौंपने का निर्देश देते हुए केंद्र सरकार के वकील को अगली सुनवाई पर जवाब देने को कहा। वहीं, पंजाब सरकार से भी पूछा है कि पीयू को बदहाल वित्तीय स्थिति से निकालने के लिए क्या किया जा रहा है? मामले की अगली सुनवाई 7 नवंबर को होगी।
पीयू के वाइस चांसलर एके ग्रोवर ने सितंबर माह के दौरान सीनेट की बैठक को संबोधित करते हुए पीयू की वित्तीय स्थिति का खुलासा करते हुए कहा था कि फंड की कमी के चलते आगामी जनवरी माह से वेतन आदि देने का संकट खड़ा हो जाएगा। हाईकोर्ट ने वीसी के इस बयान पर स्वत: संज्ञान लेते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी करते हुए वीसी को भी हाईकोर्ट में तलब कर लिया था। वीरवार को पीयू के वीसी एके ग्रोवर भी कोर्ट में मौजूद रहे।
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पीयू के सीनियर एडवोकेट गिरीष अग्निहोत्री ने अदालत से आग्रह किया कि केंद्र सरकार को फंड रिलीज करने के आदेश जारी किए जाएं, लेकिन खंडपीठ ने पीयू की वित्तीय स्थिति के बारे में पेश की गई रिपोर्ट की प्रति केंद्र के वकील को सौंपने का निर्देश देते हुए केंद्र सरकार के वकील को अगली सुनवाई पर जवाब देने को कहा। वहीं, पंजाब सरकार से भी पूछा है कि पीयू को बदहाल वित्तीय स्थिति से निकालने के लिए क्या किया जा रहा है? मामले की अगली सुनवाई 7 नवंबर को होगी।
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पीयू के वाइस चांसलर एके ग्रोवर ने सितंबर माह के दौरान सीनेट की बैठक को संबोधित करते हुए पीयू की वित्तीय स्थिति का खुलासा करते हुए कहा था कि फंड की कमी के चलते आगामी जनवरी माह से वेतन आदि देने का संकट खड़ा हो जाएगा। हाईकोर्ट ने वीसी के इस बयान पर स्वत: संज्ञान लेते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी करते हुए वीसी को भी हाईकोर्ट में तलब कर लिया था। वीरवार को पीयू के वीसी एके ग्रोवर भी कोर्ट में मौजूद रहे।
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हर साल करोड़ों का घाटा झेल रहा है पीयू
Panjab University
- फोटो : amar ujala
पीयू द्वारा कोर्ट में पेश की गई वित्तीय स्थिति को देखकर चिंतित हुए जस्टिस एसएस सारों ने कहा कि यह निराशाजनक है कि केंद्र सरकार पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के जुड़े मामलों में हमेशा सौतेला व्यवहार करता है। उन्होंने कहा कि केंद्र फंड रोककर यूनिवर्सिटी को बंद नहीं कर सकता। उन्होंने आगे कहा- विद्यार्थी कहां जाएंगे? मणिपाल यूनिवर्सिटी?... हाईकोर्ट जाने नहीं देगा।
पीयू के वकील ने अदालत के आग्रह किया कि अगर फंड रिलीज नहीं हुआ तो पीयू के लिए दिसंबर, 2016 के बाद वेतन और पेंशन का भुगतान करना असंभव हो जाएगा। वीरवार को अदालत में पीयू के वाइस चांसलर के अलावा रजिस्ट्रार जीएस चड्ढा और फाइनेंस डेवलपमेंट आफिसर विक्त्रस्म नायर भी उपस्थित थे।
पीयू के वकील ने अदालत के आग्रह किया कि अगर फंड रिलीज नहीं हुआ तो पीयू के लिए दिसंबर, 2016 के बाद वेतन और पेंशन का भुगतान करना असंभव हो जाएगा। वीरवार को अदालत में पीयू के वाइस चांसलर के अलावा रजिस्ट्रार जीएस चड्ढा और फाइनेंस डेवलपमेंट आफिसर विक्त्रस्म नायर भी उपस्थित थे।