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बॉक्सर विजेंदर और सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 25 Jul 2015 03:04 PM IST
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ऑस्क नॉट व्हॉट योर कंट्री कैन डू फॉर यू, ऑक्स व्हॉट यू कैन डू फॉर योर कंट्री....। जॉन एफ. कैनेडी के इस वक्तव्य क ो शामिल करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बॉक्सर विजेंदर के प्रोफेशनल बॉक्सिंग की दुनिया में कदम रखने के प्रकरण का स्व: संज्ञान लिया है।
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मामले में एक तल्ख नोट के साथ हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की खेल नीति में खामियां प्रतीत होने की बात ही है। साथ ही कहा है कि बॉक्सर विजेंदर ने देश की कीमत पर अपने आप को प्रफुल्लित किया और जब देश के लिए मेडल और प्रशंसा लाने का मौका आया तो वे और पैसा कमाने के लिए प्रोफेशनल हो गए।
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विजेंदर की ओर से विदेशी कंपनी से करार की खबरों पर जस्टिस राजेश बिंदल ने नोटिस लेते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस को पत्र लिखा कि इस मामले में स्व: संज्ञान लिया जाना चाहिए। इस पर जस्टिस एसके मित्तल व जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू ने हरियाणा सरकार और विजेंदर को नोटिस जारी किया गया है।
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हाईकोर्ट ने कहा है कि खेल नीति में खामियां नजर आ रही हैं। सरकारी नौकरी कर रहे खिलाड़ी लगातार विज्ञापनों में दिखते हैं। इससे वह लाखों-करोड़ों रुपये कमाते हैं। सरकार से पूछा है कि क्या इसके लिए कोई अनुमति ली जाती है। क्या ऐसा कोई प्रावधान है।
यदि कोई अनुमति दी गई तो किस नीति के तहत दी गई। सरकार से यह भी पूछा गया है कि प्रभाव वाली ऐसी हस्तियों से ऑनर किलिंग, भ्रूण हत्या और ड्रग्स के खिलाफ मुहिम में इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता।
सरकार को जारी नोटिस में हाईकोर्ट ने कहा है कि विजेंदर सरकार को धोखे में रख रहे हैं कि उन्होंने कोई कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं किया, लेकिन समाचारों में साफ हो रहा है कि वह पहले ही करार कर चुके हैं। इसके लिए उन्होंने सरकार को विश्वास में भी नहीं लिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को चाहिए कि जो खिलाड़ी देश के लिए खेलना नहीं चाहते और निजी हित व पैसे के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें प्लाटों, नौकरियों और नगद पुरस्कारों के लिए रखी शर्तों पर विचार करना चाहिए। यदि कोई खिलाड़ी देश के लिए काम नहीं करना चाहता तो ऐसी सुविधाएं वापस लेने पर भी विचार हो।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में साफ किया था कि आम करदाताओं के पैसे से सरकारी विज्ञापनों पर कोई राजनेता व व्यक्ति अपनी फोटो लगाकर निजी शोहरत हासिल नहीं कर सकता। ऐसे में इस मुद्दे पर भी हरियाणा सरकार को विचार करना चाहिए। सरकारी वकील ने हाईकोर्ट से जवाब के लिए समय मांगा है। फिलहाल मामले की सुनवाई 20 अगस्त को होगी।