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हाईकोर्ट की चिंता, लिंग जांच की प्रवृत्ति न रुकी तो खत्म हो जाएगी मानव सभ्यता
Thu, 05 Nov 2020 02:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 05 Nov 2020 02:28 AM IST
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हाईकोर्ट
- फोटो : Amar Ujala
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गर्भ में भ्रूण की जांच के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि यदि यह प्रवृत्ति नहीं रुकी तो एक दिन मानव सभ्यता का समाप्त हो जाना तय है। हाईकोर्ट ने कहा कि कठोर कानून के बावजूद इस पर लगाम नहीं लग पा रही है। जिसके चलते समानता का सांविधानिक अधिकार पाने से गर्भ में पल रही बच्ची वंचित रह जाती है।
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अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक हसन के खिलाफ मेवात के नगीना पुलिस स्टेशन में गर्भ में लिंग की जांच के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। हाईकोर्ट को बताया गया कि गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने एक फर्जी ग्राहक बनाकर याची के पास भेजा था जिसे चिह्नित नोट दिए गए थे। आरोपी ने नकली ग्राहक का अल्ट्रासाउंड किया और इसी दौरान पुलिस ने छापा मारकर एलसीडी व नोटों के साथ उसे गिरफ्तार कर लिया। अब याची ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई है।
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आरोपी हसन ने कहा कि उसकी कोई शिकायत पूर्व में नहीं आई है और कोई अल्ट्रासाउंड मशीन बरामद नहीं हुई, इसलिए गर्भ में लिंग परीक्षण अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होंगे। कोर्ट ने कहा कि भ्रूण लिंग जांच एक बीमारी है, जो समाज को निरंतर प्रभावित कर रही है। लड़के की इच्छा एक खुला सच है। कन्या भ्रूण हत्या भविष्य की महिला का विनाश है। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि जन्मपूर्व लिंग जांच करना एक बालिका को दुनिया में आने से वंचित करता है। एक सभ्य समाज इसकी अनुमति नहीं दे सकता।
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अपने आप में अनोखा है मामला
जब पुलिस और डाक्टरों की टीम ने छापा मारा तो पता चला कि केंद्र में कोई अल्ट्रासाउंड मशीन थी ही नहीं। अल्ट्रासाउंड के नाम पर पेट पर जेल लगाकर केवल दिखावे के लिए मशीन फेरी जा रही थी। असल में उन्हें एलसीडी पर पहले से रिकार्ड की गई एक वीडियो दिखाई जाती थी। इसी आधार पर याची ने कहा था कि उस पर केस नहीं बनता। हाईकोर्ट ने कहा कि याची ने पैसा लेकर लिंग बताया है भले ही मशीन नहीं थी लेकिन इस दलील से वह बच नहीं सकता।