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Highcourt: ईडब्ल्यूएस कोटे से पांच साल में कितने दाखिले दिए, फीस कितनी ली... निजी स्कूलों से रिपोर्ट तलब

Sat, 02 Dec 2023 02:47 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 02 Dec 2023 02:47 PM IST
सार

इंडिपेंडेंट स्कूला एसोसिएशन ने याचिका में कहा था कि यदि उन्हें गरीब बच्चों को प्रवेश के लिए बाध्य किया जाता है तो प्रशासन इनकी फीस का स्कूलों को भुगतान करे। इसके साथ ही यह दलील भी दी गई थी कि यदि इस कोटा के बच्चों को मुफ्त में पढ़ाया गया तो स्कूलों की आर्थिक स्थिति खराब हो जाएगी।

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High Court summons details of admission given in EWS quota in five years from private schools of Chandigarh
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo

विस्तार

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के निजी स्कूलों से पिछले पांच साल में ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत दिए गए प्रवेश का ब्योरा तलब कर लिया है। स्कूलों ने छात्रों से एक साल में कितनी फीस ली, इसकी भी जानकारी बैंक खातों के ऑडिट किए गए ब्योरे के साथ तलब की है। 
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साथ ही हाईकोर्ट ने पूछा है कि निजी स्कूलों में ईडब्ल्यूएस कोटे की 15 प्रतिशत सीटों में से कितनी सीटें खाली हैं। इसके अलावा स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और उनके वेतन का ब्योरा भी सौंपने का आदेश दिया है।
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चंडीगढ़ की इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर प्रारंभिक कक्षा में प्रवेश के समय 15 प्रतिशत सीटें आर्थिक पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करने के आदेश को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि या तो स्कूलों को बच्चों से फीस लेने की अनुमति दी जाए या फिर प्रशासन को फीस का भुगतान करने का निर्देश जारी किया जाए। मामला हाईकोर्ट में वर्ष 2020 से विचाराधीन है। अब इस मामले का निपटारा करने के लिए हाईकोर्ट ने स्कूलों और प्रशासन से कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी है।
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पूरे वर्ष की फीस का ब्योरा मांगा
हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों से विभिन्न कक्षाओं में पढ़ने वाले 6 से 14 साल के बच्चों द्वारा जमा करवाई गई पूरे वर्ष की फीस का ब्योरा मांगा है। साथ ही यह भी पूछा है कि शिक्षकों के चयन की क्या प्रक्रिया है और उनकी शैक्षणिक योग्यता क्या है और उन्हें कितना वेतन दिया जाता है। पिछले 5 साल में ईडब्ल्यूए कोटे के तहत कितने छात्रों को प्रवेश दिया गया और उनके संस्थान का संविधान व ध्येय क्या है। इसके साथ ही यह भी पूछा है कि विभिन्न कक्षाओं में छात्रों की तय संख्या कितनी है और इसमें कितनी सीटें ईडब्ल्यूएस कोटे की हैं और उनमें कितनी खाली हैं।


प्रशासन को हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर ईडब्ल्यूएस कोटा के तहत पढ़ाई कर रहे छात्रों तैयार की गई सूची सौंपने का आदेश दिया है। इसके साथ ही सरकारी संस्थानों में ईडब्ल्यूएस कोटे के खाली पदों की जानकारी भी प्रशासन से मांगी है। इसके साथ ही निजी स्कूलों को ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत भर्ती किए गए छात्रों की फीस का भुगतान करने के लिए प्रशासन के पास क्या नीति है, इस बारे में भी जानकारी सौंपने का हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को आदेश दिया है।

यह है मामला
इंडिपेंडेंट स्कूला एसोसिएशन ने याचिका में कहा था कि यदि उन्हें गरीब बच्चों को प्रवेश के लिए बाध्य किया जाता है तो प्रशासन इनकी फीस का स्कूलों को भुगतान करे। इसके साथ ही यह दलील भी दी गई थी कि यदि इस कोटा के बच्चों को मुफ्त में पढ़ाया गया तो स्कूलों की आर्थिक स्थिति खराब हो जाएगी। प्रशासन की यह दलील है कि स्कूलों को प्रशासन की ओर से भूमि रियायती दर पर दी गई थी। अलॉटमेंट के समय स्कूलों ने शर्तों को माना था और उन्हीं शर्तों के अनुसार प्रशासन ने स्कूलों को ईडब्ल्यूएस कोटा के तहत बच्चों को प्रवेश देने का आदेश जारी किया गया है।
 
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