{"_id":"388904877b1f7c9c7d8aa4b3e8ff9a83","slug":"high-court-strict-on-rajiv-rural-gas-distribution-plan","type":"story","status":"publish","title_hn":"'राजीव ग्रामीण गैस वितरण' योजना जांच घेरे में ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'राजीव ग्रामीण गैस वितरण' योजना जांच घेरे में
सुमेश ठाकुर/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 25 Mar 2014 01:57 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार की राजीव गांधी ग्रामीण गैस वितरण योजना(आरजीजीएलवीवाई) पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जांच घेरे में आ गई है।
विज्ञापन
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली पर आधारित खंडपीठ ने सिंगल बेंच के आदेशों के खिलाफ एलपीए याचिका को स्वीकार कर लिया है।
ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन की ओर से दाखिल एलपीए में सिंगल बेंच के उन आदेशों को रद् करने का आग्रह किया था, जिनमें आरजीजीएलवीवाई स्कीम के तहत गैस एजेंसी के डिस्ट्रीब्यूशन पर रोक को हटाने के निर्देश जारी हुए किए थे।
विज्ञापन
डबल बेंच ने एलपीए को स्वीकार करने के साथ ही सिंगल बेंच के आदेशों का रद् कर सिंगल बेंच को निर्देश जारी किए हैं कि इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए।
विज्ञापन
ऑल इंडिया एलजीपी डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन की अध्यक्ष हरसिमरत कौर एवं अन्य पांच ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया कि वह कारगिल शहीदों के परिवारों से संबंध रखते हैं।
इन शहीदों के सम्मान के लिए केंद्र सरकार ने ग्रामीण स्तर में एलपीजी गैस एजेंसियां अलॉट की थी। याचिका में आगे कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा 1 सितंबर 2010 की योजना और इस योजना के संबंध में 27 मई 2013 को जारी आरजीजीएलवी के व्रोशर को रद् करने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया था।
याचिका में कहा गया है कि इन ब्रोशर के तहत केंद्र सरकार ने ग्रामीण गैस वितरण प्रणाली के लिए कई और एजेंसियों के डिस्ट्रीब्यूशन की बात की है।
याचिका में कहा गया कि उनकी मौजूदा एजेंसियां महीने में महज 20 हजार से लेकर 35000 हजार का लाभ पा रही हैं, जबकि इन एजेंसियों की स्थापना के लिए एक करोड़ के करीब रुपये खर्च हो चुके हैं।
ऐसे में अगर दूसरी एजेंसियों को भी लाया जाता है, तो कोई भी लाभ नहीं कमा पाएगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार ने यह योजना राजनीतिक हित साधने के लिए लागू की है।
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने पहले 23 सितंबर 2013 को आदेश जारी कर कहा कि डिस्ट्रीब्यूशन का सिलेक्शन प्रोसेस जारी रहे, लेकिन सिलेक्शन पर मामले के अंतिम फैसले तक रोक रहेगी।
वहीं, इस मामले में दूसरी सिंगल बेंच ने रोक हटाने के आदेश जारी कर दिए। इन आदेशों को एलपीए के जरिए चुनौती दी गई है।