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Haryana: सामाजिक-आर्थिक आधार के अंकों पर हाईकोर्ट की रोक, 143 असिस्टेंट इंजीनियरों की भर्ती से जुड़ा है मामला

Fri, 20 Jan 2023 10:57 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 20 Jan 2023 10:57 PM IST
सार

याची ने कहा कि यह दोनों प्रावधान केवल हरियाणा के मूल निवासियों के लिए रखे गए हैं। इस प्रकार से तो संविधान के प्रावधान का उल्लंघन कर दूसरे राज्यों के आवेदकों को वंचित किया जा रहा है। संविधान के अनुसार देश में केवल एक ही नागरिकता है और वह भारत देश की है। इस प्रकार सार्वजनिक नियुक्तियों में राज्य के लोगों के लिए आरक्षण का प्रावधान करना देश के संविधान के खिलाफ है।

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High court stay on socio economic basis marks in recruitment of 143 assistant engineers in Haryana
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में असिस्टेंट इंजीनियर के 143 पदों की भर्ती को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए सामाजिक-आर्थिक आधार पर व अनुभव के लिए दिए जाने वाले 10 अंकों के लाभ पर रोक लगा दी है। याचिका दाखिल करते हुए सोनीपत निवासी अर्पित गहलावत ने हाईकोर्ट को बताया कि हरियाणा में असिस्टेंट इंजीनियर के 143 पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। 

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विज्ञापन के अनुसार समाजिक-आर्थिक आधार पर 10 अंक व अनुभव के 10 अंक देने का प्रावधान था। याची ने कहा कि यह दोनों प्रावधान केवल हरियाणा के मूल निवासियों के लिए रखे गए हैं। इस प्रकार से तो संविधान के प्रावधान का उल्लंघन कर दूसरे राज्यों के आवेदकों को वंचित किया जा रहा है। 
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संविधान के अनुसार देश में केवल एक ही नागरिकता है और वह भारत देश की है। इस प्रकार सार्वजनिक नियुक्तियों में राज्य के लोगों के लिए आरक्षण का प्रावधान करना देश के संविधान के खिलाफ है। याची पक्ष की दलीलों से प्राथमिक तौर पर सहमति जताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भर्ती में इन 20 अंकों के लाभ को निलंबित कर दिया है।

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निजी क्षेत्र में हरियाणा के निवासियों को 75 प्रतिशत आरक्षण मामले में जवाब दे सरकार: हाईकोर्ट
हरियाणा सरकार की ओर से निजी क्षेत्र की नौकरियों में हरियाणा के निवासियों को दिए गए 75 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को याचिका पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। फरीदाबाद इंडस्ट्रियल एसोसिएशन व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया था कि निजी क्षेत्र में योग्यता और कौशल के अनुसार लोगों का चयन किया जाता है। यदि नियोक्ताओं से कर्मचारी को चुनने का अधिकार ले लिया जाएगा तो उद्योग कैसे आगे बढ़ सकेंगे। हरियाणा सरकार का 75 प्रतिशत आरक्षण का फैसला योग्य लोगों के साथ अन्याय है। यह कानून उन युवाओं के सांविधानिक अधिकारों का हनन है, जो अपनी शिक्षा और योग्यता के आधार पर भारत के किसी भी हिस्से में नौकरी करने को स्वतंत्र हैं।

हरियाणा सरकार कह चुकी है कि संविधान के जिस प्रावधान का हवाला देकर यह एसोसिएशन हाईकोर्ट पहुंची है, वह नागरिकों के लिए है, कंपनी पर वह लागू ही नहीं होता। ऐसे में याचिका को खारिज किया जाए। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा किए गए इस प्रावधान पर रोक लगा दी थी। इसके बाद हरियाणा सरकार अपील में सुप्रीम कोर्ट पहंची थी और कहा था कि हाईकोर्ट ने बिना उनका पक्ष सुने आरक्षण पर रोक लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने रोक का आदेश रद्द करते हुए पिछले साल हाईकोर्ट को एक माह के भीतर केस का निपटारा करने का आदेश दिया था। आदेश के बावजूद केस का अभी निपटारा नहीं हो सका है। ऐसे में अब हाईकोर्ट ने 17 फरवरी को सुनवाई तय की है।

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