{"_id":"65bdd049e049fb51e6047c57","slug":"high-court-sought-reply-from-haryana-government-on-making-section-506-bailable-offence-2024-02-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Highcourt: देश भर में जमानती है धारा 506 तो हरियाणा में गैर जमानती क्यों... हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Highcourt: देश भर में जमानती है धारा 506 तो हरियाणा में गैर जमानती क्यों... हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
Sat, 03 Feb 2024 12:04 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 03 Feb 2024 12:04 PM IST
सार
धारा 506 देश भर में जमानती है। हरियाणा में इसे गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है। याचिका में कहा गया है कि पुलिस अक्सर इस धारा को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती है इसलिए इसे हरियाणा में इसे गैर जमानती अपराध बनाया जाए।
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जान से मारने की धमकी देने से जुड़ी धारा 506 को जमानती अपराध बनाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए पंचकूला निवासी एडवोकेट अंशुल मंगला ने हाईकोर्ट को बताया कि आजादी से पहले 1932 में तत्कालीन सरकार ने अधिसूचना जारी कर सीआरपीसी की धारा 506 को जमानती अपराध बताया था। इस अधिसूचना में राज्यों को छूट दी गई थी कि वे चाहे तो इसे गैर जमानती अपराध के तौर पर अधिसूचित कर सकते हैं।
याची ने बताया कि यह अपराध हरियाणा में गैर जमानती रखा गया है। याचिका में हाईकोर्ट से अपील की गई है कि जन हित में इस धारा को जमानती अपराध की श्रेणी में रखा जाए ताकि पुलिस व राजनीतिज्ञ इसका गलत इस्तेमाल न कर सकें।
विज्ञापन
याची ने बताया कि देश भर में जमानती अपराध है लेकिन हरियाणा में यह गैर जमानती अपराध है। इसे पुलिस अक्सर अपने लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती है। ऐसे में हाईकोर्ट से अपील की गई कि इस मामले में दखल दिया जाए और हरियाणा में इसे जमानती अपराध के तौर पर अधिसूचित किया जाए। हाईकोर्ट ने इस पर हरियाणा सरकार को अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
याचिका दाखिल करते हुए पंचकूला निवासी एडवोकेट अंशुल मंगला ने हाईकोर्ट को बताया कि आजादी से पहले 1932 में तत्कालीन सरकार ने अधिसूचना जारी कर सीआरपीसी की धारा 506 को जमानती अपराध बताया था। इस अधिसूचना में राज्यों को छूट दी गई थी कि वे चाहे तो इसे गैर जमानती अपराध के तौर पर अधिसूचित कर सकते हैं।
विज्ञापन
याची ने बताया कि यह अपराध हरियाणा में गैर जमानती रखा गया है। याचिका में हाईकोर्ट से अपील की गई है कि जन हित में इस धारा को जमानती अपराध की श्रेणी में रखा जाए ताकि पुलिस व राजनीतिज्ञ इसका गलत इस्तेमाल न कर सकें।
विज्ञापन
याची ने बताया कि देश भर में जमानती अपराध है लेकिन हरियाणा में यह गैर जमानती अपराध है। इसे पुलिस अक्सर अपने लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती है। ऐसे में हाईकोर्ट से अपील की गई कि इस मामले में दखल दिया जाए और हरियाणा में इसे जमानती अपराध के तौर पर अधिसूचित किया जाए। हाईकोर्ट ने इस पर हरियाणा सरकार को अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।