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हाईकोर्ट का फैसला: गुजारा भत्ता की वसूली के लिए सैनिक की सैलरी अटैच नहीं कर सकते, ये वेतन जब्ती से सुरक्षित

Thu, 19 Dec 2024 08:12 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 19 Dec 2024 08:12 AM IST
सार

सेना में नायक ने 4 जून, 2019 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत गुजारा भत्ता के बकाया 4.10 लाख रुपये की वसूली के लिए उसका वेतन कुर्क करने का आदेश दिया गया था।

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High Court says Soldier salary cannot be attached for recovery of alimony
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पत्नी को गुजारा भत्ता न देने के चलते फैमिली कोर्ट सेना के जवान की सैलरी जब्त नहीं कर सकती। सेना के जवान का वेतन सेना अधिनियम-1950 के तहत जब्ती से सुरक्षित है।
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नायक के पद पर कार्यरत भारतीय सेना के जवान ने याचिका दाखिल करते हुए 4 जून, 2019 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत गुजारा भत्ता के बकाया 4.10 लाख रुपये की वसूली के लिए उसका वेतन कुर्क करने का आदेश दिया गया था। याची ने बताया कि उसका विवाह विवाह 4 दिसंबर 2011 को सिख रीति-रिवाजों से हुआ था। बाद में उनके बीच वैवाहिक विवाद उत्पन्न हो गया और पत्नी ने गुजारा भत्ता की मांग करते हुए याचिका दायर की। 
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याची को आदेश दिया गया था कि वह पत्नी को प्रति माह 10 हजार रुपये का गुजारा भत्ता दे। बाद में पत्नी ने बकाया राशि वसूलने के लिए एक आवेदन दायर किया, जिसके तहत याचिकाकर्ता की सैलरी का एक-तिहाई हिस्सा जब्त करने का आदेश दिया गया। हाईकोर्ट ने पारिवारिक अदालत के आदेश को रद्द कर दिया और पत्नी को सुझाव दिया कि वह गुजारा भत्ता राशि के भुगतान के लिए केंद्रीय सरकार से संपर्क करें।
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हाईकोर्ट ने कहा कि सिविल कोर्ट रखरखाव के लिए आदेश जारी कर सकती है, लेकिन सेना के कर्मियों की सैलरी की कटौती केवल केंद्रीय सरकार के माध्यम से ही हो सकती है। यदि सिविल कोर्ट कोई आदेश देती है, तो लाभार्थी को इसे सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना होगा और आवश्यक कटौती के लिए अनुरोध करना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पत्नी को केंद्रीय सरकार से संपर्क कर सैलरी से आवश्यक कटौती करवाने का अधिकार है। हाईकोर्ट ने कहा कि सैनिकों को बाहरी वित्तीय दबावों से मुक्त रखकर उनकी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने की क्षमता सुनिश्चित करने के लिए सेना अधिनियम के तहत उन्हें कई अधिकार और सुरक्षा प्रदान की गई है।
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