फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court said With whom the child wants to live it is important to know while giving custody

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा: बच्चा किसके साथ रहना चाहता है, कस्टडी देते समय यह जानना जरूरी

Sat, 15 Jan 2022 12:03 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 15 Jan 2022 12:03 AM IST
सार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्ची की कस्टडी की मांग से जुड़ी याचिका पर कहा कि माता-पिता के दावे से बढ़कर बच्चे का कल्याण और भला देखना जरूरी है। बच्चा किसके साथ रहना चाहता है, यह भी जानना जरूरी है। इसी के साथ हाईकोर्ट ने मां की याचिका खारिज कर दी।

विज्ञापन
High Court said With whom the child wants to live it is important to know while giving custody
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्ची की कस्टडी से जुड़ी मां की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि कस्टडी देते हुए यह जानना बेहद जरूरी है कि बच्ची किसके साथ रहना चाहती है। हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता के दावे से ज्यादा बच्चे का कल्याण और भला देखना जरूरी है। फाजिल्का निवासी महिला ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि उसका विवाह 2014 में हुआ था और 2015 में उनकी बेटी हुई थी। 

विज्ञापन


याची व उसके पति के बीच लगातार विवाद बना रहता था इसलिए वह सितंबर 2020 को बेटी के साथ घर छोड़ कर जाने लगी। ऐसा करने पर पति और उसके रिश्तेदारों ने याची से मारपीट की और बेटी को लाने नहीं दिया। निचली अदालत ने इस मामले में यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट में बच्ची की कस्टडी के लिए दाखिल महिला की याचिका पर पति ने कहा कि उसकी पत्नी की घर में कलह करती थी और खुद घर छोड़ कर गई है। 
विज्ञापन


वह अपनी बेटी की बेहतर देखभाल कर रहा है। शहर के सबसे बेहतरीन स्कूल में पढ़ाई करवा रहा है। बेटी भी उसके साथ बहुत खुश है। जब कोर्ट ने बेटी से पूछा तो उसने अपनी मां के बजाय पिता और दादा-दादी के साथ ही रहने की इच्छा जताई। इसके बाद पांच साल की बच्ची की कस्टडी की मांग को लेकर दाखिल मां की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे की कस्टडी के मामले में माता-पिता का अधिकार ही सर्वोपरि नहीं है बल्कि यह भी देखना बेहद जरूरी है कि बच्ची का भला  और कल्याण किसके साथ है। साथ ही यह भी देखना जरूरी है कि बच्ची किसके साथ रहना चाहती है। हाईकोर्ट ने बच्ची को उसके पिता, दादा और दादी के साथ ही रहने का आदेश दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed