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पदोन्नति का पद समाप्त होना कर्मचारी के मौलिक अधिकार का हनन नहीं: हाईकोर्ट
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-कहा, पद सृजित करना और समाप्त करना नियोक्ता का अधिकार, अदालत का दखल ठीक नहीं
बीएसएफ में एसआई व एएसआई के पदों में कटौती, दखल से हाईकोर्ट का इन्कार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पद सृजित करना और समाप्त करना नियोक्ता का अधिकार है, अदालतों को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। यदि पदोन्नति का पद समाप्त किया जाता है तो इसे पद के दावेदार के मौलिक अधिकार का हनन नहीं माना जा सकता है। याचिका दाखिल करते हुए बीएसएफ में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर पानीपत निवासी अनुराधा ने बताया था कि वह फार्मासिस्ट कैडर से हैं। फरवरी से पहले उनके कैडर में 11 इंस्पेक्टर, 55 सब इंस्पेक्टर और 302 असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर थे। इसके बाद फरवरी में पदों की संख्या में बदलाव किया गया और 11 सूबेदार मेजर, 25 इंस्पेक्टर, 51 सब इंस्पेक्टर व 230 असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के पद रखे गए। याची ने कहा कि सब इंस्पेक्टर के 4 पद कम करने से उसका पदोन्नति का दावा प्रभावित होता है जो उसके मौलिक अधिकार का हनन है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि बीएसएफ ने पदों को लेकर अपनी आवश्यकता के अनुसार परिवर्तन किया है। पद सृजित करना और समाप्त करना नियोक्ता का कार्य है और अदालतों को इसमें अनावश्यक दखल नहीं देना चाहिए। याची के पदोन्नति के मौलिक अधिकार का हनन तब माना जा सकता था जब एक पद के लिए दो समान लोगों में भेदभाव किया जाता। इस मामले में पदोन्नति का पद समाप्त किया गया है और इसके समाप्त होते ही पदोन्नति के मौलिक अधिकार का दावा भी समाप्त हो जाता है। हाईकोर्ट ने कहा कि याची यह मानती है कि सब इंस्पेक्टर के पद कम होने से उसकी पदोन्नति का रास्ता रुक गया है लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि इंस्पेक्टर व सूबेदार मेजर के पद बढ़े हैं जो भविष्य में उसके लिए और अधिक अवसर पैदा करेगा।
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बीएसएफ में एसआई व एएसआई के पदों में कटौती, दखल से हाईकोर्ट का इन्कार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पद सृजित करना और समाप्त करना नियोक्ता का अधिकार है, अदालतों को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। यदि पदोन्नति का पद समाप्त किया जाता है तो इसे पद के दावेदार के मौलिक अधिकार का हनन नहीं माना जा सकता है। याचिका दाखिल करते हुए बीएसएफ में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर पानीपत निवासी अनुराधा ने बताया था कि वह फार्मासिस्ट कैडर से हैं। फरवरी से पहले उनके कैडर में 11 इंस्पेक्टर, 55 सब इंस्पेक्टर और 302 असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर थे। इसके बाद फरवरी में पदों की संख्या में बदलाव किया गया और 11 सूबेदार मेजर, 25 इंस्पेक्टर, 51 सब इंस्पेक्टर व 230 असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के पद रखे गए। याची ने कहा कि सब इंस्पेक्टर के 4 पद कम करने से उसका पदोन्नति का दावा प्रभावित होता है जो उसके मौलिक अधिकार का हनन है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि बीएसएफ ने पदों को लेकर अपनी आवश्यकता के अनुसार परिवर्तन किया है। पद सृजित करना और समाप्त करना नियोक्ता का कार्य है और अदालतों को इसमें अनावश्यक दखल नहीं देना चाहिए। याची के पदोन्नति के मौलिक अधिकार का हनन तब माना जा सकता था जब एक पद के लिए दो समान लोगों में भेदभाव किया जाता। इस मामले में पदोन्नति का पद समाप्त किया गया है और इसके समाप्त होते ही पदोन्नति के मौलिक अधिकार का दावा भी समाप्त हो जाता है। हाईकोर्ट ने कहा कि याची यह मानती है कि सब इंस्पेक्टर के पद कम होने से उसकी पदोन्नति का रास्ता रुक गया है लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि इंस्पेक्टर व सूबेदार मेजर के पद बढ़े हैं जो भविष्य में उसके लिए और अधिक अवसर पैदा करेगा।