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Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court said taking care of wife and children is social, moral and legal responsibility of husband

Haryana: पति की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- पत्नी और बच्चों की देखभाल सामाजिक, नैतिक व कानूनी जिम्मेदारी

Tue, 24 Jan 2023 02:26 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 24 Jan 2023 02:26 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने याची की दलील को खारिज करते हुए कहा कि पत्नी और बच्चों की देखभाल करना पति की नैतिक, समाजिक व कानूनी जिम्मेदारी है। याची अपनी इस जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। हाईकोर्ट ने 10 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने के फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए पति की याचिका को खारिज कर दिया।

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High Court said taking care of wife and children is social, moral and legal responsibility of husband
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

वैवाहिक विवाद के चलते अलग रह रही पत्नी व उसके साथ रह रहे बच्चों की देखभाल के लिए पति न केवल समाजित व नैतिक बल्कि कानूनी रूप से बाध्य है। पति अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी पति द्वारा भिवानी की फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील को खारिज करते वक्त की।

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पति ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर बताया था कि उसका विवाह फरवरी 2017 में हुआ था। इसके बाद दोनों के बीच विवाद हुआ और दोनों अलग रहने लगे। पत्नी ने गुजारे के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। फैमिली कोर्ट ने पति की आय का आंकलन करने के बाद उसे पत्नी व बच्चों के गुजारे के लिए 10 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता के रूप में देने का आदेश दिया। 
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फैमिली कोर्ट के फैसले को पति ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दे दी थी। अपील में याची ने हाईकोर्ट में कहा कि फैमिली कोर्ट ने उसकी आय का गलत आंकलन किया है। याची की आय आंकलन की गई राशि से काफी कम है। हाईकोर्ट ने याची की दलील को खारिज करते हुए कहा कि पत्नी और बच्चों की देखभाल करना पति की नैतिक, समाजिक व कानूनी जिम्मेदारी है। याची अपनी इस जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। हाईकोर्ट ने 10 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने के फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए पति की याचिका को खारिज कर दिया।

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