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काल्पनिक पदों के खिलाफ शिकायत पर निर्णय लें वरना गृह विभाग के एसीएस हों हाजिर : हाईकोर्ट
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-आईपीएस वाई पूरन कुमार की याचिका पर एसीएस होम को अवमानना नोटिस
-ऐसे पदों पर नियुक्तियां कर जनता की गाढ़े पसीने की कमाई लुटाने का है याचिका में आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आईपीएस अधिकारियों को काल्पनिक पदों पर नियुक्ति देकर जनता के गाढ़े पसीने की कमाई लुटाने का डीजीपी पर आरोप लगाते हुए गृह विभाग को दी गई शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि यदि अगली सुनवाई तक कार्रवाई नहीं की गई तो उन्हें खुद पेश होकर जवाब देना होगा।
आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार ने हाईकोर्ट को बताया कि प्रदेश के डीजीपी आईपीएस अधिकारियों को काल्पनिक पद दे रहे हैं। डीजी लॉ एंड आर्डर, डीजी एडमिनिस्ट्रेशन आदि पदों का कोई अस्तित्व ही नहीं है। इन पदों को सृजित करने के लिए सक्षम अधिकारियों से मंजूरी तक नहीं ली गई है। अधिकारियों को इन पदों पर नियुक्ति देकर इसकी एवज में सरकारी खजाने से भुगतान किया जाता है जो राज्य के खजाने को नुकसान है। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने राज्यपाल व राष्ट्रपति को भी शिकायत दी थी। राज्यपाल कार्यालय ने शिकायत को मुख्य सचिव को भेजते हुए कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष रखने की सिफारिश की थी। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। याची ने हाई कोर्ट से अपील की थी कि 16 जून को सौंपी गई उसकी शिकायत पर कार्रवाई का आदेश जारी किया जाए और इन काल्पनिक पदों के माध्यम से जो सरकारी पैसा निकाला गया है, उसकी जांच करवाई जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही इन पदों के माध्यम से पैसा निकालने पर रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट ने गत वर्ष अक्टूबर में गृह विभाग को आदेश दिया था कि याची की सौंपी गई शिकायत पर दस सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।
अब अवमानना याचिका दाखिल करते हुए याची ने बताया कि आदेश के बावजूद इसका पालन नहीं किया गया। जस्टिस राजबीर सहरावत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एसीएस होम को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर अगली सुनवाई तक आदेश का पालन नहीं हुआ तो प्रतिवादी अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह को कोर्ट में स्वयं पेश होकर जवाब देना होगा।
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-ऐसे पदों पर नियुक्तियां कर जनता की गाढ़े पसीने की कमाई लुटाने का है याचिका में आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आईपीएस अधिकारियों को काल्पनिक पदों पर नियुक्ति देकर जनता के गाढ़े पसीने की कमाई लुटाने का डीजीपी पर आरोप लगाते हुए गृह विभाग को दी गई शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि यदि अगली सुनवाई तक कार्रवाई नहीं की गई तो उन्हें खुद पेश होकर जवाब देना होगा।
आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार ने हाईकोर्ट को बताया कि प्रदेश के डीजीपी आईपीएस अधिकारियों को काल्पनिक पद दे रहे हैं। डीजी लॉ एंड आर्डर, डीजी एडमिनिस्ट्रेशन आदि पदों का कोई अस्तित्व ही नहीं है। इन पदों को सृजित करने के लिए सक्षम अधिकारियों से मंजूरी तक नहीं ली गई है। अधिकारियों को इन पदों पर नियुक्ति देकर इसकी एवज में सरकारी खजाने से भुगतान किया जाता है जो राज्य के खजाने को नुकसान है। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने राज्यपाल व राष्ट्रपति को भी शिकायत दी थी। राज्यपाल कार्यालय ने शिकायत को मुख्य सचिव को भेजते हुए कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष रखने की सिफारिश की थी। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। याची ने हाई कोर्ट से अपील की थी कि 16 जून को सौंपी गई उसकी शिकायत पर कार्रवाई का आदेश जारी किया जाए और इन काल्पनिक पदों के माध्यम से जो सरकारी पैसा निकाला गया है, उसकी जांच करवाई जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही इन पदों के माध्यम से पैसा निकालने पर रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट ने गत वर्ष अक्टूबर में गृह विभाग को आदेश दिया था कि याची की सौंपी गई शिकायत पर दस सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।
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अब अवमानना याचिका दाखिल करते हुए याची ने बताया कि आदेश के बावजूद इसका पालन नहीं किया गया। जस्टिस राजबीर सहरावत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एसीएस होम को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर अगली सुनवाई तक आदेश का पालन नहीं हुआ तो प्रतिवादी अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह को कोर्ट में स्वयं पेश होकर जवाब देना होगा।
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