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एनडीपीएस के मामले में सैंपल लेते हुए मजिस्ट्रेट की मौजूदगी और सत्यापन अनिवार्य : हाईकोर्ट
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राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में लिए सैंपल अमान्य, याची दोषमुक्त करार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि मजिस्ट्रेट की गैरमौजूदगी में लिए गए सैंपल को एनडीपीएस के मामलों में सबूत नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में भरे गए सैंपल के आधार पर दोषी करार दिए गए याचिकाकर्ता को बरी करते हुए यह आदेश जारी किया है।
याचिका दाखिल करते हुए फरीदाबाद निवासी जानकीदास ने उसे नशा तस्करी मामले में दोषी करार देने और सजा के आदेश को चुनौती दी थी। एफआईआर के अनुसार पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि याची नशा तस्करी कर रहा है। इस सूचना के आधार पर नाका लगाकर याची को 5 किलो गांजा के साथ पकड़ा गया था। फरीदाबाद की अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए 5 साल की सजा सुनाई थी। याची ने बताया कि उसे इस मामले में फंसाया गया है। जांच भी इस मामले में पूरी तरह से दोषपूर्ण थी। हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों पर गौर करने के बाद पाया कि एनडीपीएस के सेक्शन 52 का सही प्रकार से पालन नहीं किया गया था। इस मामले में राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में ही याची की तलाशी ली गई और सैंपल भी उनकी मौजूदगी में भरे गए। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में न तो सैंपल भरे गए और न ही सत्यापित करवाए गए। हाईकोर्ट ने कहा कि एनडीपीएस के मामले में यह अनिवार्य है कि सैंपल मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में भरे जाएं और इस दौरान उनकी फोटो एकत्रित करने के बाद सत्यापित करवाया जाए। इस प्रक्रिया का पालन किए बगैर याची को दोषी करार दिया गया था जो गलत है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए याची को दोषमुक्त करार दे दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि मजिस्ट्रेट की गैरमौजूदगी में लिए गए सैंपल को एनडीपीएस के मामलों में सबूत नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में भरे गए सैंपल के आधार पर दोषी करार दिए गए याचिकाकर्ता को बरी करते हुए यह आदेश जारी किया है।
याचिका दाखिल करते हुए फरीदाबाद निवासी जानकीदास ने उसे नशा तस्करी मामले में दोषी करार देने और सजा के आदेश को चुनौती दी थी। एफआईआर के अनुसार पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि याची नशा तस्करी कर रहा है। इस सूचना के आधार पर नाका लगाकर याची को 5 किलो गांजा के साथ पकड़ा गया था। फरीदाबाद की अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए 5 साल की सजा सुनाई थी। याची ने बताया कि उसे इस मामले में फंसाया गया है। जांच भी इस मामले में पूरी तरह से दोषपूर्ण थी। हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों पर गौर करने के बाद पाया कि एनडीपीएस के सेक्शन 52 का सही प्रकार से पालन नहीं किया गया था। इस मामले में राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में ही याची की तलाशी ली गई और सैंपल भी उनकी मौजूदगी में भरे गए। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में न तो सैंपल भरे गए और न ही सत्यापित करवाए गए। हाईकोर्ट ने कहा कि एनडीपीएस के मामले में यह अनिवार्य है कि सैंपल मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में भरे जाएं और इस दौरान उनकी फोटो एकत्रित करने के बाद सत्यापित करवाया जाए। इस प्रक्रिया का पालन किए बगैर याची को दोषी करार दिया गया था जो गलत है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए याची को दोषमुक्त करार दे दिया।
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