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पुलिस हिरासत में अपराध कबूल करने के आधार पर किसी को नहीं ठहराया जा सकता दोषी : हाईकोर्ट

Tue, 02 Jul 2024 05:30 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jul 2024 05:30 AM IST
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High Court said No one can be held guilty on the basis of confession of crime in police custody
-डकैती और चोरी की संपत्ति की बरामदगी के मामले में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को किया रिहा
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-फतेहाबाद निवासी व्यक्ति को निचली अदालत ने माना था दोषी, सुनाई थी पांच साल की सजा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डकैती व चोरी की संपत्ति की बरामदगी के मामले में निचली अदालत द्वारा दोषी करार देने और पांच साल की सजा को गलत करार देते हुए याची को रिहा करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में याची ने पुलिस की हिरासत में अपराध कबूल किया है। इस आधार पर सजा सुनाई गई है, जबकि ऐसा नहीं किया जा सकता। फतेहाबाद निवासी नवदीप ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी करार देने और पांच साल की सजा के आदेश को चुनौती दी थी। एफआईआर के अनुसार याची बंदूक के दम पर कार की डकैती में शामिल था। कार को बाद में बरामद किया गया था जो बिना नंबर प्लेट के चलाई जा रही थी। सुधीर नाम के व्यक्ति को कार के साथ पकड़ा गया था और उसने पूछताछ में याची का नाम लिया था। याची को गिरफ्तार करने के बाद याची ने अपना गुनाह कबूल किया था। याची ने कहा कि पुलिस की हिरासत मेंं लिए गए बयान के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि इस पर विश्वास करने से केस गलत दिशा में जाएगा। हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस की जांच पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अभियोजन के अनुसार चार लोगों ने बंदूक की नोक पर डकैती की थी, क्या चार लोगों द्वारा की गई लूट को डकैती माना जा सकता है। प्रावधानों के अनुसार 5 या इससे अधिक लोगों के गिरोह को ही डकैती माना जा सकता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने इसे डकैती न मान कर लूट माना और कहा कि याची को इस अपराध के लिए दोषी माना जा सकता है। याची तीन साल की सजा काट चुका है और ऐसे में हाईकोर्ट ने काटी गई सजा को काफी मानते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है।
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