फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court said it is illegal to detain a citizen without legal compulsion

पत्रकार गिरफ्तारी मामला: हाईकोर्ट ने कहा- कानूनी अनिवार्यता के बिना किसी नागरिक को हिरासत में रखना अवैध

Tue, 09 May 2023 09:26 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 09 May 2023 09:26 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि बिना कानूनी अनिवार्यता के किसी नागरिक को हिरासत में रखना वैध नहीं है और अदालत इस बारे में आंखें नहीं मूंद सकती है। इन टिप्पणियों के बीच हाईकोर्ट ने अब भावना किशोर के साथ ही उनके दोनों साथियों को भी अंतरिम जमानत दे दी है।

विज्ञापन
High Court said it is illegal to detain a citizen without legal compulsion
पत्रकार भावना किशोर। - फोटो : @BhawanaKishore

विस्तार

एससी/एसटी एक्ट में हुई पत्रकार भावना किशोर की गिरफ्तारी के मामले में मंगलवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कैमरामैन और ड्राइवर की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने कहा कि कानूनी अनिवार्यता के बिना किसी नागरिक को हिरासत में रखना अवैध है और अदालत इसके प्रति आंखें नहीं मूंद सकती है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने पत्रकार भावना गुप्ता के साथ अब कैमरामैन मृत्युंजय व ड्राइवर परमिंदर सिंह को अंतरिम जमानत दे दी है। इस मामले में एफआईआर रद्द करने की मांग पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 22 मई तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

विज्ञापन


एफआईआर को खारिज करने की मांग को लेकर पत्रकार भावना गुप्ता व अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान याची पक्ष ने इस पूरे मामले में पंजाब पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। याची ने कहा कि जिस समाचार चैनल के लिए वह काम कर रही थी, वह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ 45 करोड़ रुपये की लागत से उनके आधिकारिक आवास के निर्माण/पुनर्निर्माण के लिए रिपोर्टिंग कर रहा था। जवाबी हमले के रूप में चैनल को सबक सिखाने के लिए झूठा मामला दर्ज किया गया है।
विज्ञापन


मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस मामले में गिरफ्तार कैमरामैन व ड्राइवर के खिलाफ कोई गैर-जमानती धारा नहीं थी। ऐसे में उन्हें बेल बॉन्ड भरकर तुरंत जमानत मिल सकती थी लेकिन उन्हें इस बारे में पुलिस ने जानकारी नहीं दी। मजिस्ट्रेट और स्पेशल कोर्ट ने भी उन्हें ज्यूडिशियल हिरासत में भेजते हुए इस बारे में ध्यान नहीं दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि बिना कानूनी अनिवार्यता के किसी नागरिक को हिरासत में रखना वैध नहीं है और अदालत इस बारे में आंखें नहीं मूंद सकती है। इन टिप्पणियों के बीच हाईकोर्ट ने अब भावना किशोर के साथ ही उनके दोनों साथियों को भी अंतरिम जमानत दे दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed