जीरा शराब फैक्टरी मामला: हाईकोर्ट ने कहा- पहले प्रदर्शन खत्म करें किसान, फिर मांगों पर गठित हो सकती कमेटी
हाईकोर्ट ने कहा कि उनकी मांग मानी जा सकती है और इसके लिए उच्चस्तरीय जांच कमेटी भी गठित करने को हम तैयार हैं। कमेटी के सदस्य भी प्रदर्शनकारी ही तय करें लेकिन उसके लिए फैक्टरी के बाहर से धरना हटाना जरूरी है। अगर फैक्टरी बंद रही तो कैसे इसकी जांच की जा सकती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जीरा की शराब फैक्टरी के बाहर कई महीनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के वकील को साफ कर दिया कि फैक्टरी से निकलने वाले दूषित केमिकल की जांच के लिए कमेटी गठित करने के आदेश दिया जा सकता है लेकिन इससे पहले विरोध प्रदर्शन को खत्म करना होगा। हाईकोर्ट ने प्रदर्शनकारियों को उनका पक्ष रखने के लिए 48 घंटे की मोहलत दी और सुनवाई 23 दिसंबर को तय की है।
मंगलवार को सुनवाई आरंभ होते ही पंजाब सरकार ने बताया कि फैक्टरी का गेट खुलवा दिया गया है और एफआईआर भी दर्ज की गई है। फैक्टरी की ओर से बताया गया कि उनके टैंकर अंदर नहीं जाने दिए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की तरफ से कहा गया कि यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है जो पर्यावरण से जुड़ा है।
पंजाब सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल विनोद घई ने बताया कि वहां प्रदर्शन को लेकर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और उनकी संपत्ति की सूची भी तैयार की गई है। प्रदर्शनकारियों की तरफ से सीनियर एडवोकेट आरएस बैंस ने कहा कि यह मुद्दा इस फैक्टरी के नजदीक के कई गांव के लोगों से जुड़ा है। फैक्टरी से जो प्रदूषण हो रहा है उससे लोग बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में इस फैक्टरी से हो रहे प्रदूषण की उच्चस्तरीय जांच बेहद जरूरी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि उनकी मांग मानी जा सकती है और इसके लिए उच्चस्तरीय जांच कमेटी भी गठित करने को हम तैयार हैं। कमेटी के सदस्य भी प्रदर्शनकारी ही तय करें लेकिन उसके लिए फैक्टरी के बाहर से धरना हटाना जरूरी है। अगर फैक्टरी बंद रही तो कैसे इसकी जांच की जा सकती है।
याचिकाकर्ता कंपनी मालब्रोस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उनकी यूनिट के बाहर प्रदर्शनकारी बैठ गए हैं और इसे बंद कर दिया गया है। उनकी यूनिट पर पर्यावरण मानकों के उल्लंघन का आरोप है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जांच करने के बाद उन्हें आगे काम करने की स्वीकृति दे चुका है। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने इस यूनिट की एनजीटी की मॉनिटरिंग कमेटी से जांच की मांग की थी। एनजीटी की मॉनिटरिंग कमेटी की जांच में भी सब ठीक पाया गया।
फैक्टरी को हुए नुकसान की एवज में सरकार 20 करोड़ करवा चुकी है जमा
फैक्टरी के बाहर धरने को खत्म करवाने में विफल रहने के कारण हाईकोर्ट ने कंपनी के नुकसान की भरपाई के लिए 20 करोड़ रुपये हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करवाने का पंजाब सरकार को आदेश दिया था। कंपनी ने कोर्ट को बताया था कि इस यूनिट को लगाने में 300 करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं, 200 करोड़ बाजार से उठाए गए थे। फैक्टरी को चलाने और स्टाफ के वेतन पर डेढ़ करोड़ का खर्च है और दो करोड़ रुपये प्रतिमाह किस्त देनी पड़ती है। सरकार प्रदर्शनकारियों से मिली हुई है और ऐसे में उनका हर महीने करोड़ों का नुकसान हो रहा है।