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हजारों करोड़ के घोटाले भी अब देश के नागरिकों को नहीं करते हैरान : हाईकोर्ट

Wed, 28 Feb 2024 03:11 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 28 Feb 2024 03:11 AM IST
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High Court said Even scams worth thousands of crores no longer surprise the citizens of the country
-विधायक धर्म सिंह छौक्कर की ईडी के खिलाफ याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने की टिप्पणी
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कहा-हमारा काम अनाज को भूसे से अलग करना, निराधार मुकदमेबाजी को हतोत्साहित करना जरूरी
-नागरिकों के अधिकारों का हनन भी न हो और अदालतों में मुकदमों की बाढ़ भी न आए

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। देश में अब सैकड़ों और हजारों करोड़ रुपये के घोटाले नागरिक को आश्चर्यचकित नहीं करते क्योंकि अब यह बहुत आम हो गया है। ऐसे मामलों से अदालतों का समय बर्बाद होता है लेकिन हमारा काम अनाज को भूसे से अलग करना है। जहां मामला झूठा है, उसे समाप्त करना भी हमारी जिम्मेदारी है तो वहीं निराधार मुकदमेबाजी को हतोत्साहित करना भी जरूरी है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह टिप्पणियां पानीपत के समालखा से कांग्रेस विधायक धर्म सिंह छौक्कर की याचिका को खारिज करते हुए की। याचिका में छौक्कर ने बताया कि ईडी ने उनके गुरुग्राम, दिल्ली व पानीपत में मौजूद आवास पर रेड की थी। मामला गुरुग्राम में जनवरी 2021 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा हुआ है। इस मामले में उनके, उनके बेटों व अन्य पर धोखाधड़ी व ठगी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत के आधार पर करोड़ों की ठगी के मामले में जांच की जा रही थी और इसी क्रम में ईडी ने यह कार्रवाई की थी। छौक्कर ने याचिका में कहा था कि अदालत एफआईआर पर रोक लगा चुकी है और ऐसे में जब एफआईआर पर रोक है तो इसी एफआईआर से शुरू हुई ईडी की कार्रवाई वैध नहीं है। साथ ही समन आदेश और गैर जमानती वारंट भी खारिज किए जाने चाहिए।

हाईकोर्ट ने मंगलवार को जारी किए विस्तृत आदेश में कहा कि किसी देश की अर्थव्यवस्था पर प्रहार करने वाले आर्थिक अपराध तेजी से बढ़े हैं। सैकड़ों और हजारों करोड़ के घोटाले अब आम बात हो गए हैं। इन विवादों से संबंधित मुकदमेबाजी में अदालतों का काफी समय बर्बाद हो रहा है। जहां कोई कार्रवाई अवैध तरीके से हो रही है हमें उसे खत्म करना होगा। साथ ही निरर्थक और विलासितापूर्ण मुकदमेबाजी को हतोत्साहित करने की जरूरत है। अनाज को भूसी से अलग करना न्यायालयों का काम है और हमें सुनिश्चित करना होगा कि नागरिकों के अधिकारों का हनन न हो तो वहीं अदालतों में मुकदमेबाजी की बाढ़ भी न आए।
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हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि एफआईआर और ईडी की कार्रवाई दोनों अलग हैं। यदि एफआईआर पर रोक लग जाती है तो इसका मतलब यह नहीं कि ईडी की कार्रवाई भी रोक दी जाए। साथ ही यह भी कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ दो एफआईआर पर रोक है जबकि उनके खिलाफ धोखाधड़ी की कई अन्य एफआईआर भी मौजूद हैं। साथ ही समन व गैर जमानती वारंट को कार्रवाई का अहम हिस्सा बताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इनमें दखल देना जांच एजेंसी को कमजोर करना होगा। ऐसे में हाईकोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ ही धर्मसिंह छौक्कर की याचिका को खारिज कर दिया।
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