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Highcourt: सिलाई के पैसे मांगने पर दर्जी पर लगाया था NDPS का फर्जी मामला, पंजाब सरकार को रिपोर्ट देने के आदेश
Tue, 27 Feb 2024 11:46 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 27 Feb 2024 11:46 AM IST
सार
याचिकाकर्ता बाबू खान ने याचिका में आरोप लगाया था कि जब उसने पुलिस अधिकारियों से उनकी वर्दी की सिलाई के पैसे मांगे तो पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट में उस पर केस दर्ज किया था। उसने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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विस्तार
मालेरकोटला में पुलिस से वर्दी की सिलाई के पैसे मांगने पर दर्जी के खिलाफ नशा तस्करी का झूठा मामला दर्ज करने के आरोपों की जांच रिपोर्ट पेश न करने पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाई है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आखिरी मौका देते हुए जांच पूरी करने और कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
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इस मामले में याचिकाकर्ता बाबू खान ने एडवोकेट रणदीप सिंह वड़ैच के माध्यम से हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया था कि जब उसने पुलिस अधिकारियों से उनकी वर्दी की सिलाई के पैसे मांगे तो पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट में उस पर केस दर्ज किया था। उसने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी।
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इससे पहले 14 दिसंबर 2023 को पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि जांच को निष्पक्ष तरीके से पूरा करने के लिए आईजीपी फरीदकोट की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी की ओर से बताया गया कि उन्होंने फोटो, पेन ड्राइव व अन्य सामग्री सीएफएसएल चंडीगढ़ को सौंप दी है लेकिन उन्होंने ओरिजनल डीवीआर मांगी है ताकि सटीक परिणाम दिया जा सके। एसआईटी को ओरिजनल डीवीआर सौंपने से इन्कार करते हुए याची ने कहा कि उसे पंजाब पुलिस पर विश्वास नहीं है और वह डीवीआर सीधे केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) चंडीगढ़ में जमा करवाना चाहता है।
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हाईकोर्ट ने दर्जी की मांग को स्वीकार कर लिया था और उसे सीधे सीएफएसएल में डीवीआर जमा करवाने की छूट दे दी थी। हाईकोर्ट ने विशेष जांच दल को इस मामले में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था और स्पष्ट कर दिया था कि यदि पुलिस वालों के खिलाफ आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और इसके लिए एसआईटी पूर्ण रूप से सशक्त है। सोमवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने जवाब के लिए 6 सप्ताह की मोहलत मांगी। इसका विरोध करते हुए याची पक्ष ने कहा कि मामले को लटकाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने जवाब में देरी पर पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए अब जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया है।