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हाईकोर्ट की फटकार: उपलब्धियों का बखान करने के बजाय नागरिकों की जान बचाएं सरकारें, दो सप्ताह में मांगा जवाब

Thu, 15 Feb 2024 11:36 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 15 Feb 2024 11:36 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों व यूटी प्रशासन को आदेश दिया है कि सुरक्षा की मांग को लेकर की गई व्यवस्था के बारे में विस्तृत प्रचार किया जाए और इसके बारे में सीएम विंडो की तरह हर किसी को जानकारी होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि पोस्ट से शिकायत भेजने का जमाना पुराना हो गया है। अब डिजिटल युग है और एप के माध्यम से सुरक्षा की मांग पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए।

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High Court reprimanded Haryana-Punjab govt and UT administration for couple cases despite arrangements
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

विस्तार

राज्य सरकारों द्वारा प्रेमी जोड़ों की सुरक्षा को लेकर प्रबंध के बावजूद हाईकोर्ट में बढ़ते मामलों पर पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा-पंजाब की सरकारों व यूटी प्रशासन को जमकर फटकार लगाई। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि विज्ञापन से उपलब्धियों का बखान करने के बजाय नागरिकों की जान बचाने के लिए काम किया जाना चाहिए। जो हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं और जो पोर्टल बनाया गया है, उसका प्रचार होना चाहिए, ताकि लोगों को इस बारे में जानकारी मिले। हाईकोर्ट ने अब दोनों राज्यों व यूटी प्रशासन को ठोस कदम उठाते हुए दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट प्रेमी जोड़ों की दर्जनों याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है और पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब व यूटी प्रशासन को आदेश दिया था कि हर जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त करने के सुझाव पर विचार किया जाए। नोडल अधिकारी को तय समय सीमा के भीतर जोड़ों के मांगपत्र पर निर्णय लेने और इसमें विफल रहने पर जिम्मेदारी तय करने की बात कही है। साथ ही नोडल अधिकारी के विफल रहने पर अपीलेट अथॉरिटी का विकल्प तैयार करने की व्यवस्था करने का आदेश दिया है। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि इन सभी में विफल रहने पर ही जोड़ों के पास हाईकोर्ट आने का विकल्प होना चाहिए। इसके जवाब में हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ ने हाईकोर्ट से समय देने की मांग की। कोर्ट को बताया गया कि उनके पास मानक संचालन प्रक्रिया मौजूद है और हेल्प लाइन नंबर भी हैं लेकिन इसे बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।


हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे नंबर और मानक संचालन प्रक्रिया का क्या फायदा, जब इनके बारे में आम लोगों को जानकारी ही नहीं है। कोर्ट ने सरकारों को नसीहत देते हुए कहा कि उपलब्धियों के बखान के स्थान पर इन नंबरों व पोर्टल के बारे में आम लोगों में जागरूकता लाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। यहां सवाल आपके नागरिकों के जीवन से जुड़ा है। राज्य सरकारों की कोताही के चलते इन नंबरों के बारे में लोगों को पता नहीं लग पाता है कि राज्य में सुरक्षा की मांग को लेकर व्यवस्था भी मौजूद है।
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