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हाईकोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार: 74 वर्षीय पूर्व सैनिक को नहीं दी विकलांगता पेंशन, देना होगा एक लाख जुर्माना
Sat, 13 Sep 2025 08:45 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 13 Sep 2025 08:45 AM IST
सार
न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता को विकलांगता पेंशन का हकदार माना गया था। 8 नवंबर, 2024 के आदेश के अनुसार उनकी विकलांगता पेंशन आज तक जारी नहीं की गई। याचिकाकर्ता 74 वर्ष के हैं सरकार के रवैए के कारण उन्हें वर्तमान अवमानना याचिका दायर करने के लिए बाध्य होना पड़ा है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 74 वर्षीय पूर्व सैन्यकर्मी की विकलांगता पेंशन जारी करने की मांग को लेकर दायर अवमानना याचिका में अनुपालन रिपोर्ट तक न दाखिल करने को स्पष्ट अवहेलना करार देते हुए सेना व केंद्र को कड़ी फटकार लगाई है।
कोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना भरने की शर्त पर अनुपालन के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया। पूर्व सिग्नलमैन गुरचरण सिंह ने जस्टिस अल्का सरीन से कहा कि बार-बार स्थगन और पहले भी जुर्माना लगाए जाने के बावजूद, प्रतिवादियों ने न तो अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की और न ही निर्देशानुसार जुर्माना जमा किया।
न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता को विकलांगता पेंशन का हकदार माना गया था। 8 नवंबर, 2024 के आदेश के अनुसार उनकी विकलांगता पेंशन आज तक जारी नहीं की गई। याचिकाकर्ता 74 वर्ष के हैं सरकार के रवैए के कारण उन्हें वर्तमान अवमानना याचिका दायर करने के लिए बाध्य होना पड़ा है। जस्टिस सरीन ने कहा कि इससे पहले अदालत 20 और 50 हजार का जुर्माना लगा चुकी है लेकिन अभी तक पालन नहीं हुआ। कोर्ट को बताया गया कि 20 हजार का जुर्माना जमा करवाया जा चुका है लेकिन 50 हजार का अभी बाकी है।
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केंद्र सरकार ने कहा कि वह अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने 8 नवंबर, 2024 के आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है। न्यायमूर्ति सरीन ने कहा कि मामले को आगे स्थगित करने का कोई आधार नहीं बनता। हालांकि, न्याय के हित में एक लाख रुपये के जुर्माने के भुगतान पर एक आखिरी मौका दिया जाता है।
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कोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना भरने की शर्त पर अनुपालन के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया। पूर्व सिग्नलमैन गुरचरण सिंह ने जस्टिस अल्का सरीन से कहा कि बार-बार स्थगन और पहले भी जुर्माना लगाए जाने के बावजूद, प्रतिवादियों ने न तो अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की और न ही निर्देशानुसार जुर्माना जमा किया।
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न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता को विकलांगता पेंशन का हकदार माना गया था। 8 नवंबर, 2024 के आदेश के अनुसार उनकी विकलांगता पेंशन आज तक जारी नहीं की गई। याचिकाकर्ता 74 वर्ष के हैं सरकार के रवैए के कारण उन्हें वर्तमान अवमानना याचिका दायर करने के लिए बाध्य होना पड़ा है। जस्टिस सरीन ने कहा कि इससे पहले अदालत 20 और 50 हजार का जुर्माना लगा चुकी है लेकिन अभी तक पालन नहीं हुआ। कोर्ट को बताया गया कि 20 हजार का जुर्माना जमा करवाया जा चुका है लेकिन 50 हजार का अभी बाकी है।
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केंद्र सरकार ने कहा कि वह अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने 8 नवंबर, 2024 के आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है। न्यायमूर्ति सरीन ने कहा कि मामले को आगे स्थगित करने का कोई आधार नहीं बनता। हालांकि, न्याय के हित में एक लाख रुपये के जुर्माने के भुगतान पर एक आखिरी मौका दिया जाता है।