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Punjab News: हाईकोर्ट ने कहा- 1984 के भयावह क्षणों की याद दिलाती हैं टिप्पणियां, याची जमानत का हकदार नहीं
Wed, 13 Dec 2023 07:17 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 13 Dec 2023 07:17 PM IST
सार
पंजाब सरकार की ओर से जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि केवल माफी मांगने से याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप बेअसर नहीं होंगे। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला भारत के इतिहास के सबसे काले दौर और भयावह क्षणों की याद दिलाती है जो वर्ष 1984 में हुआ था।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिंदू नेता सुधीर सूरी की हत्या के बाद सिखों को निशाना बनाते हुए वीडियो अपलोड़ करने वाले राहुल शर्मा की जमानत याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि उनकी टिप्पणियां 1984 के काले समय की याद दिलाती हैं जब दंगे हुए और लोगों को जान गंवानी पड़ी।
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याचिका दाखिल करते हुए राहुल शर्मा ने बताया था कि गत वर्ष चार नवंबर को अमृतसर के मजीठा रोड पर गोपाल मंदिर के बाहर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान शिवसेना नेता सुधीर सूरी पर हमला किया गया था, जिसमे उनकी मृत्यु हो गई थी। याची पर आरोप है कि सुधीर सूरी की मौत के बाद पूरे सिख समुदाय के नरसंहार का आह्वान किया था। दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा करने के आरोप में याची को गिरफ्तार किया गया था। घटना के छह महीने बाद याची को गिरफ्तार किया गया था। राहुल शर्मा ने सुधीर सूरी की हत्या के बाद सिख समुदाय को निशाना बनाते हुए एक वीडियो अपलोड किया था।
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पंजाब सरकार की ओर से जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि केवल माफी मांगने से याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप बेअसर नहीं होंगे। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला भारत के इतिहास के सबसे काले दौर और भयावह क्षणों की याद दिलाती है जो वर्ष 1984 में हुआ था।
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प्रधानमंत्री की हत्या के बाद इस देश में देशभर में दंगे हुए और हजारों लोग मारे गए। मारे गए लोगों के आश्रित आज भी उस पीड़ा को झेल रहे हैं। याचिकाकर्ता द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए शब्द बेहद संगीन प्रकृति के हैं। यदि याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह गवाहों को डरा सकता है और जांच को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने याची की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है।