फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court rejected plea of mother accused of sexually abusing her son along with her lover

Highcourt: प्रेमी संग दो साल के बच्चे का यौन शोषण करने वाली मां को जमानत नहीं, HC ने कहा-ये हकदार नहीं

Fri, 15 Nov 2024 10:22 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 15 Nov 2024 10:22 AM IST
सार

पंजाब निवासी महिला ने याचिका दाखिल करते हुए 2 वर्षीय बेटे के साथ अपने कथित प्रेमी संग अवैध यौन गतिविधियों में शामिल करने के मामले में दर्ज एफआईआर में अग्रिम जमानत की मांग की थी। बच्चे के पिता की शिकायत पर पुलिस ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया था।

विज्ञापन
High Court rejected plea of mother accused of sexually abusing her son along with her lover
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रेमी के साथ मिलकर अपने 2 वर्षीय बेटे का यौन शोषण करने की आरोपी मां को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत का हकदार न मानते हुए उसकी याचिका को खारिज कर दिया है। 

विज्ञापन


हाईकोर्ट ने कहा कि मां की भूमिका बच्चे की देखभाल और पालन-पोषण करना है, लेकिन इस तरह के आरोप चिंताजनक और शर्मनाक हैं। यह पूरे समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
विज्ञापन


पंजाब निवासी महिला ने याचिका दाखिल करते हुए 2 वर्षीय बेटे के साथ अपने कथित प्रेमी संग अवैध यौन गतिविधियों में शामिल करने के मामले में दर्ज एफआईआर में अग्रिम जमानत की मांग की थी। बच्चे के पिता की शिकायत पर पुलिस ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया गया था कि उसकी पत्नी ने लगभग 4 साल पहले सह-आरोपी के साथ अवैध संबंध विकसित किए थे। उसने हाल ही में अपनी पत्नी के मोबाइल फोन पर अपने 2 साल के बेटे की दो परेशान करने वाली तस्वीरें देखीं। इन तस्वीरों में याचिकाकर्ता का कथित प्रेमी, छोटे बच्चे के साथ दुर्व्यवहार करता हुआ दिखाई दे रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की हरकतें और आचरण, विशेष रूप से पीड़ित बच्चे की मां के रूप में, बेहद चिंताजनक हैं। यह शर्मिंदगी का कारण बने हैं, जिससे पूरे समाज पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। यदि ऐसी हरकतें सच साबित होती हैं, तो यह न केवल एक मां के रूप में उसके कर्तव्यों का उल्लंघन है, बल्कि मां-बच्चे के रिश्ते में निहित कानूनी और नैतिक जिम्मेदारियों के प्रति उपेक्षा भी होगी।


याचिकाकर्ता द्वारा सह आरोपी संग मिलकर किए गए इस अपराध से समाज के ताने-बाने पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। अग्रिम जमानत की राहत का उद्देश्य व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है और निर्णय लेते समय न्यायालय को व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक हितों की रक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपों की गंभीरता और याचिकाकर्ता के आचरण की प्रकृति को देखते हुए कहा कि इस तरह के अपराध की उचित जांच की जानी चाहिए। रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे यह माना जा सके कि याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है। अपराध की प्रकृति और गंभीरता तथा याचिकाकर्ता की विशिष्ट भूमिका से यह निष्कर्ष निकलता है कि वह अग्रिम जमानत की रियायत का हकदार नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed