विशेष पिछड़े वर्ग के 500 पद रह गए खाली, हाईकोर्ट ने सामान्य वर्ग से भरन के दिए आदेश
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हरियाणा में 5000 कांस्टेबल की भर्ती प्रक्रिया तो पूरी हो गई लेकिन इसके तहत विशेष पिछड़े वर्ग के 500 पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस वर्ग के खाली पदों पर तय कानून के अनुसार सामान्य वर्ग के आवेदकों को भर्ती करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट की जस्टिस रीतू बाहरी ने इस संबंध में पलवल के कृष्ण सहित अन्य 13 आवेदकों की ओर से एडवोकेट विक्रम श्योराण और मजलिस खान के जरिये दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार और कर्मचारी चयन आयोग को आदेश जारी किए।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कर्मचारी चयन आयोग ने जुलाई, 2015 में पुरुष कांस्टेबल के 5000 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। इनमें 1650 सामान्य, 1000 अनुसूचित जाति, 800 बीसीए, 550 बीसीबी, 500 विशेष पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग में आर्थिक पिछड़ों के 500 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे।
याचिका में कहा गया कि हरियाणा सरकार ने जनवरी, 2013 में एक नोटिफिकेशन जारी कर जाट सहित अन्य छह जातियों को विशेष पिछड़े वर्ग में शामिल करते हुए भर्तियों और दाखिलों में इन्हें 10 प्रतिशत और फिर सितंबर, 2013 में एक अन्य नोटिफिकेशन के जरिए सामान्य वर्ग के आर्थिक पिछड़ों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का निर्णय किया था।
तब हाईकोर्ट ने इन दोनों नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी। बाद में सामान्य वर्ग के आर्थिक पिछड़ों को दिए गए आरक्षण को रद्द कर दिया गया और सरकार ने सामान्य वर्ग के आर्थिक पिछड़ों के 500 पदों को सामान्य वर्ग में जोड़कर इन पदों पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों की नियुक्तियां कर दीं। इसके बावजूद विशेष पिछड़े वर्ग के 500 पदों पर नियुक्तियां नहीं की गई और यह पद खाली ही छोड़ दिए गए।
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को इस मामले में आगामी 20 जनवरी के लिए नोटिस जारी करते हुए खाली रह गए उक्त 500 पदों को सामान्य वर्ग में शामिल करके इन पर नियुक्तियां करने के आदेश दे दिए।