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Chandigarh: हरियाणा GRP ने किया छात्र का यौन शोषण, हाईकोर्ट ने कहा- पंजाब की SIT करें जांच ताकि न्याय मिल सके
Fri, 24 Nov 2023 09:43 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 24 Nov 2023 09:43 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी हरियाणा पुलिस के तत्वावधान में आने वाले जीआरपी अधिकारी हैं और ऐसे में उचित न्याय व आरोपों की सत्यता की जांच की जिम्मेदारी पंजाब पुलिस को दी जाती है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक आईपीएस अधिकारी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित करेंगे जो तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में देगी।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा के जाखल में राजकीय रेलवे पुलिस अधिकारियों द्वारा छात्र पर थर्ड डिग्री टॉर्चर व यौन शोषण के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के डीजीपी को जांच के लिए आईपीएस अधिकारी की अगुवाई में एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में घटना और आरोप को इतना भयावह बताया कि इसे आदेश में भी नहीं दर्ज किया जा सकता। संगरूर का एक छात्र प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेने बठिंडा पहुंचा था और 10 अक्तूबर 2022 को स्टेशन पर मुख्य टिकट निरीक्षक ने संदेह के आधार पर उसे रोक लिया।
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याची ने काली पैंट और सफेद शर्ट पहनी थी जिसे उन्होंने संदेहजनक माना। उसे पहले बठिंडा जीआरपी को सौंपा गया और बाद में जाखल जीआरपी पोस्ट भेजा गया, जहां उस पर एफआईआर दर्ज की गई। आरोप के अनुसार उसे थर्ड डिग्री दी गई और यौन उत्पीड़न किया गया। हालत गंभीर होने तक उसे उचित चिकित्सा देखभाल से भी वंचित रखा गया।
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आठ दिसंबर को उसे हिसार सिविल अस्पताल में रेफर किया गया। डॉक्टर ने जांच में पाया कि यह यौन उत्पीड़न का मामला है। उसके बाद उसे 10 दिसंबर को जमानत पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद उसका इलाज पीजीआई में करवाया गया। पीड़ित के मलाशय की जांच से साफ हुआ कि यौन उत्पीड़न हुआ है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि हिरासत में यातना आज के समय में खतरनाक और व्यापक बीमारी बन गई है। पीड़ित के साथ हिरासत में जो किया गया वह भयानक प्रकृति का था क्योंकि वह पुलिस अधिकारियों की दया पर निर्भर था जो किसी की निगरानी में नहीं था। हिरासत में इस तरह की यातना अक्सर पीड़ित को गंभीर आघात पहुंचाती है। इससे उसे शेष जीवन के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
आरोपी हरियाणा पुलिस के तत्वावधान में आने वाले जीआरपी अधिकारी हैं और ऐसे में उचित न्याय व आरोपों की सत्यता की जांच की जिम्मेदारी पंजाब पुलिस को दी जाती है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक आईपीएस अधिकारी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित करेंगे जो तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में देगी।